कलमकार सत्येन्द्र सिंह

Tragedy


3.5  

कलमकार सत्येन्द्र सिंह

Tragedy


दूध

दूध

1 min 119 1 min 119

वह रोज़ रोज़ की किटकिट से परेशान हो चुके थे.

“अरे उस दिन घर से दो लाश निकल जाती तो बेहतर था...एक के साथ एक फ्री...तेरी माँ बस छोड़ कर निकलना था...निकल गई...” – कहते हुए वह घर से बाहर निकलने वाले था...हमेशा के लिए.

“दादू...” – तोतले अंदाज़ में बोलते हुए उनकी डेढ़ साल की पोती ने अपनी दूध की बोतल उनके मुंह में डालने का प्रयास किया.वह इस दूध के कर्ज़ से बंधकर फिर से रुक गए.



Rate this content
Log in

More hindi story from कलमकार सत्येन्द्र सिंह

Similar hindi story from Tragedy