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Kumar Vikrant

Comedy Drama


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Kumar Vikrant

Comedy Drama


दो ढक्कन

दो ढक्कन

8 mins 352 8 mins 352

रात के २ बजे डब्बू जब दिल्ली से सड़क के रास्ते गुलफाम नगर पहुँचा तो वो बहुत थका हुआ था। छक्कन दादा के कहने पर सुबह ही दिल्ली के लिए निकला था और दिल्ली में रह रहे उनके दोस्त प्रोफ़ेसर धूमकेतु से मिला था। प्रोफेसर ने डब्बू को २ बड़े आकार के ढक्कन दिए थे जिन्हें प्रोफेसर ने उसे छक्कन दादा तक पहुँचाने के लिए कहा था।

डब्बू उन दोनों ढक्कनों को लेकर जब छक्कन दादा की घुड़साल में पहुँचा तो में अजब नजारा था। घुड़साल में दो अजीबोगरीब प्राणी इधर उधर टहल रहे थे। उनमें से एक जो इंसान जैसा लगता था वो बिना रुके घरती के सब भगवानों को भोजपुरी में कोस रहा था वो लगभग पाँच फ़ीट का था, दूसरा जो ढाई फ़ीट का था वो बार-बार भाग कर एक ड्रम में घुस जाता था।

"क्या भैया, छक्कन दादा ने ये नमूने से कहाँ से पकड़ लिए......?" डब्बू ने ढक्कन घुड़साल के बरामदे में रखते हुए कहा।

"ये नमूने एलियन है.......वो पाँच फ़ीट ऊँचा पीके है और वो ढाई फीटिया जादू है।" छक्कन दादा के दूसरे चेले झब्बन ने उन दोनों पर निगाह रखते हुए कहा।

"ये यहाँ क्या कर रहे है?"

"अबे करना क्या.......छक्कन दादा को पड़ी लकड़ी लेने का शौक है, दिल्ली में उनका एक दोस्त है मकरकेतु, उसने ये नमूने यहाँ भेजे है।"

"छक्कन दादा क्या करेगा इनका?"

"करना क्या है, इन्हें इनके देश भेजने का इंतजाम करेगा....."

"वो कैसे?" डब्बू ने हँस कर पुछा।

"ज्यादा दाँत मत फाड़, इतनी ही इच्छा है जानने कि तो जा छक्कन दादा से ही पूछ ले। " झब्बन चिढ़ कर बोला।

छक्कन दादा के घुड़साल की छत पर एक प्रयोगशाला का नजारा था। छत पर लगभग पाँच विशालकाय टेलिस्कॉप लगे थे। बीस से पच्चीस महिला पुरुष विशालकाय प्रोसेसर से कनेक्ट कर कम्प्यूटर लिए उनमें लगातार कुछ टाइप कर रहे थे।

लगभग पाँच लंबे तड़ंगे विदेशी लगातार सेटेलाइट फोन पर बाते करते हुए कंप्यूटर डाटा पर नजर रख रहे थे।

एक बड़ी सी कुर्सी पर छक्कन दादा बैठा हुआ इन सब क्रियाकलाप को देख रहा था तभी सी एन एन की रिपोर्टर उरसला स्वार्ज अपने दल-बल के साथ आ पहुँची और वहाँ हो रही गतिविधियों को गौर से देख कर एक विदेशी से मुखातिब हुई, "पीटर व्हाट इज आल दिस, व्हाट आर यू अप टु हियर इन इंडिया?" (पीटर ये क्या हो रहा है और तुम इंडिया में क्या कर रहे हो?)

"उरसला, प्रिटी बीजी राइट नाउ........आइल आंसर आल योर क्वेस्चन्स......पार्डन मी नाउ।" (उरसला अभी मैं बहुत व्यस्त हूँ, मैं तुम्हारे सब सवालों का जवाब दूँगा, अभी मुझे माफ़ करो) कहकर वो विदेशी अपने काम में व्यस्त हो गया।

"बट पीटर........." (लेकिन पीटर) उरसला बोली।

"उरसला आयम बीजी, बट अवर होस्ट मिस्टर छत्रकेतु में स्पेयर अ फ्यू मोमेंट्स फॉर यू आय थिंक........" (उरसला मैं व्यस्त हूँ, लेकिन मेरा विचार है हमारे मेजबान छत्रकेतु तुम्हे कुछ समय दे सकते है शायद) विदेशी छक्कन दादा को उसके असली नाम से पुकारते हुए बोला।

उरसला ने ठंडी साँस ली और छक्कन दादा के पास पड़ी खाली कुर्सी पर बैठते हुए बोली, "मिस्टर छत्रकेतु ये सब क्या हो रहा है ये सेटी (सर्च फॉर एक्स्ट्रा टेरस्ट्रियल लाइफ) को लोग तुम्हारे घर की छत पर क्या कर रहे है?"

सवाल अंग्रेजी में पूछा गया था। छक्कन दादा ने पीटर की तरफ देखा तो उसने सहमति से सिर हिला दिया। इसके बाद छक्कन दादा और उरसला स्वार्ज का वार्तालाप अंग्रेजी में शुरू हुआ।

छक्कन दादा बोला, "उरसला यहाँ से दस करोड़ प्रकाश वर्ष दूर गैलेक्सी विक्टा ६००० से पिछले एक सप्ताह से कुछ सिग्नल आ रहे जिनका एक पैटर्न है; सेटी वाले एक सप्ताह से उन सिग्नल का अध्ययन दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जाकर कर रहे है क्योकि हर दिन ये पैटर्न आधा घंटा आकर गायब हो जाता है और फिर ५००० मील की दूरी के बाद ये पैटर्न फिर मिल जाता है लेकिन हर ५००० मील की दूरी के बाद ये पैटर्न बदल जाता है; उसी पैटर्न का पीछा करते हुए सेटी के लोग इंडिया आ पहुँचे है और उसी पैटर्न का इंतजार कर रहे है।"

"तुम्हारी घुड़साल पर?"

"हाँ मेरी घुड़साल पर, क्योंकि मेरे अमेरिकन मित्र स्वान लुडविग जो मेरा और पीटर का मित्र है, ने मेरा रेफरेंस दिया और मैंने पीटर को अपनी घुड़साल की छत उनके काम के लिए दे दी........"

"ओके; आप अन्य ग्रहों पर जीवन के बारे में क्या कहते हो?"

"मेरा क्या कहना, दुनिया के बड़े-बड़े वैज्ञानिक इस बात को मानते है कि हमारी धरती के अलावा अन्य ग्रहों पर भी जीवन है।"

"ये जीवन कैसा होगा? हॉलीवुड और बॉलीवुड की फिल्मो जैसा होगा या कुछ अलग ही होगा?"

"उरसला उन ग्रहो पर जो जीवन होगा वो तो कहना मुश्किल है लेकिन हॉलीवुड और बॉलीवुड की फिल्मो जैसा तो बिलकुल नहीं होगा।"

"तुम इतना स्योर कैसे हो?"

"उरसला इस तरह सोचो कि कभी कुछ सालो बाद अगर हम लंबी स्पेस यात्रा की गुत्थी को सुलझा कर करोड़ों प्रकाश वर्ष की दूरी की यात्रा कर पाने में सक्षम हुए तो हम इस यात्रा में मनुष्य के स्थान पर ऐसे रोबोट को भेजेंगे जो मनुष्य की तरह सोच सके और जिनका जीवन बहुत लंबा हो।"

"आप कहना क्या चाहते है मिस्टर छत्रकेतु?"

"ऐसा समझो उरसला कि एक प्रकाश वर्ष की दूरी को एक सेकंड में तय करना चाहते है तो क्या मनुष्य शरीर इस यात्रा के काबिल है अभी?"

"नहीं है......"

"तो इसलिए हम वहाँ हाड़-मांस के बने रोबोट भेजेंगे जो बहुत होशियार और अपनी सुरक्षा कर पाने में सक्षम होंगे और हर प्रकार की एक्स्ट्रा टेरस्ट्रियल जिंदगी के साथ हर प्रकार से निपटने में सक्षम होंगे, यदि एक्स्ट्रा टेरस्ट्रियल जीव हिंसक होंगे तो वो उनसे हिंसक तरीकों से निपटेंगे और अगर एक्स्ट्रा टेरस्ट्रियल जीव बुद्धिमान होंगे तो वो उनसे बुद्धिमत्ता पूर्ण व्यवहार करेंगे।"

"आप कहना क्या चाहते है?"

"मै सिर्फ तुम्हारे सवाल का जवाब दे रहा हूँ कि जो भी एलियन लाइफ धरती पर आएगी वो इतनी बेवकूफ नहीं होगी कि कोई भी उनसे उनका लॉकेट छीन कर भाग जाए और वो यही धरती पर फंस जाये या आते ही मार-काट शुरू कर दे जो अक्सर हॉलीवुड और बॉलीवुड की फिल्मो के एलियन करते है......."

"इंडियन फिल्मों में एलियन......कभी सुना नहीं?

"हैं उरसला; दो बहुत ही मशहूर एलियन है......."

"कौन?"

छक्कन दादा कुछ बोलना चाह रहा था कि तभी सेटी के लोगों में हलचल हुई और गैलेक्सी विक्टा ६००० से वही सिग्नल एक अलग ही पैटर्न में आने के बारे में बात करने लगे। उन्होंने दूसरे भी सुन सके इसलिए अपने विशालकाय स्पीकरों की आवाज बढ़ा दी। यह एक अजीब सा म्यूजिक था ऐसा लग रहा था कोई काँच पर पत्थर रगड़ रहा है।

"पीटर अब ये पैटर्न आ गया है तो हमारे मेहमानों को भी उनके घर जाने में मदद कर दो।" छक्कन दादा बोला।

"अच्छा जादू और पीके को......?"

"हाँ मै उनकी ही बात कर रहा हूँ......."

"प्रोफेसर धूमकेतु से उनके बनाए दो ढक्कन मँगा लिए?"

"हाँ मंगा लिए........."

"तो जल्दी से वो ढक्कन मँगाओ.......पीके और जादू को भी ले आओ।" पीटर अपने काम में व्यस्तता के बावजूद भी छक्कन दादा से बात करते हुए बोला।

छक्कन दादा ने अपने मूँह में अपनी दो ऊँगली डाल कर जोर की सिटी मारी।

पाँच मिनट बाद दो ढक्कन लिए डब्बू छत पर आ गया और वो दोनों ढक्कन पीटर के बताए स्थान पर रख दिए।

डब्बू के पीछे-पीछे छक्कन दादा का दूसरा चेला झब्बन जादू को गोद में लेकर आ गया। पीके भी अपनी आँखे फाड़कर उनके पीछे-पीछे छत पर आ पहुँचा।

"क्या करना है पीटर?" छक्कन दादा ने पीटर की और देखते हुए बोला।

"ये दो ढक्कन जो प्रोफेसर धूमकेतु ने भेजे है ये कई एलियन धातुओं के मिश्रण से बनाए गए है इन ढक्कनों पर इन दो ढक्कनों, मेरा मतलब जादू और पीके को खड़ा कर दो।" पीटर ने जवाब दिया।

"उससे क्या होगा?" छक्कन दादा ने पूछा।

"है तो दूर की कोड़ी.....लेकिन ये सिग्नल अगर इनकी दुनिया से आ रहे है तो इन दोनों पर कुछ प्रभाव पड़ेगा और ये सिग्नल का जवाब देंगे तो हो सकता है इनके वापिस जाने का कोई रास्ता बन जाए।" पीटर बोला।

"सही है......खड़ा कर दो इनको प्रोफ़ेसर धूमकेतु के भेजे ढक्कनों पर......" छक्कन दादा ने अपने गुर्गो को हुक्म दिया।

हुक्म मिलते ही छक्कन दादा के गुर्गो ने जादू और पीके को उन ढक्कनों पर खड़ा कर दिया और पीटर ने उनके सिरों पर सैकड़ों तारो से जुड़े हुए ढक्कननुमा हेलमेट रख दिए, उन हेलमेट के जरिये गैलेक्सी विक्टा ६००० से आने वाले सिग्नल उनके दिमागों तक जाने लगे।

सिग्नल जाने के दो मिनट बाद दोनों तड़फ उठे और पीके ढक्कन से कूद कर जादू के पास जाकर जोर-जोर से रोते हुए कहने लगा, "हमका बचाय लियो बड़के भैया, हमका नहीं खड़ा होना ई ढक्कन पे अउर नहीं पहनना ई ढक्कनवा।"

"रो मत छुटके, ई ससुर के नाती हमका बकलोल समझते बाटे, तनी इधर आव जरा इनका मजा चखा दिया जाई........" कहकर जादू ने रोते हुए पीके के सिर पर हाथ रखके पुचकारा।

सिर पर जादू का हाथ लगते ही पीके जोर से गुर्राया और बंदरों की तरह उछलते हुए वहाँ खड़े लोगो और सेटी के साजो सामान पर टूट पड़ा। पाँच मिनट बाद छक्कन दादा सहित उसके गुर्गे, पीटर और सेटी के लोग, उरसला और सी एन एन के लोग गड्मड्ड हुए पड़े थे। सेटी का साजो-सामान चारो तरफ बिखरा पड़ा था।

"बहुत हुआ छुटके भईया.......छोड़ा जाई इनका और अपने देशवा चला जाय......" जादू चिल्ला कर बोला।

"सही कहे बड़के भईया........" कहते हुए पीके ने जादू को गोद में उठाया और घुड़साल की छत से कूदकर अँधेरे में गायब हो गया।

"ई क्या था........ मेरा मतलब ये क्या था?" उरसला धूल चाट रहे पीटर और छक्कन दादा की और देख कर बोली।

"उरसला तुमने बॉलीवुड के एलियन के बारे में पुछा था न......तो यही थे एलियन।" छक्कन दादा कराहते हुए बोला।

"अजीब थे........" उरसला अपनी ड्रेस से धूल साफ करते हुए बोली।

"दोनों बिछड़े भाई थे.......इन सेटी वालो के ढक्कन पहन कर और प्रोफेसर धूमकेतु के ढक्कनों पर खड़े होते ही उन्हें सब याद आ गया और दोनों ने मिलकर हम सबका बैंड बजा दिया।" छक्कन दादा फर्स से उठते हुए बोला।

पीटर ने हिकारत भरी निगाह से उरसला और छक्कन दादा की तरफ देखा और बोला, "करम फूटे थे मेरे जो यहाँ चला आया, बेलिस क्या सिग्नल की रिकॉर्डिंग सलामत है?"

"रिकॉर्डिंग सेटी हेडक़्वार्टर पहुँच चुकी है, सामान को कुछ ख़ास नुकसान नहीं हुआ है....."

"तो अब यहाँ क्या करना है, चलो अगले डेस्टिनेशन पर चलने की तैयारी करो, इंडिया में उन नमूनों के हाथ पिटना ही नसीब में था।" कहकर पीटर जाने की तैयारी करने लगा।


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