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Sanjay Arjoo

Abstract Classics Inspirational

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Sanjay Arjoo

Abstract Classics Inspirational

दो चाय (लघुकथा)

दो चाय (लघुकथा)

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दो चाय (लघुकथा)

एक सप्ताह पहले ही रिटायर हुए जगजीत का बेटा"अभय"रिटायरमेंट कार्यक्रम के बाद कल अपनी पत्नी के साथ  अमेरिका के लिए निकल गया,बड़ी बेटी निव्या पहले ही शादी कर लंदन में सैटल्ड है।
बच्चों की सफलता की खुशी जगजीत और उसकी पत्नी मीरा के चेहरे पर स्पष्ट दिखाई दे रही थी।  मन में सुखद रिटायरमेंट की खुशी और  बच्चों की सफलता का संतुष्टि लिए आज सुबह जगजीत ने पत्नी मीरा को भी अपने साथ सुबह की सैर  पर चलने के लिए मना लिया। 
    खुले आसमान में सभी जिम्मेदारियों से मुक्त  हल्के मन से चहल कदमी करते दोनों  एक दूसरे से बातें करते  हुए शहर के उस छोटे से तालाब किनारे जा पहुंचे जहां कुछ सीढ़ियां बनी थी।
पास की टपरी से चाय की खुशबू  आ रही थी। जगजीत ने आंखों ही आंखों में  मीरा की सहमति ले, टपरी वाले को इशारे से दो चाय लाने के लिए कहा, और दोनो तालाब किनारे बनी उन सीढियों पर ही  बैठ गए। 
जगजीत आंख भर कर आसमान की तरफ देख ही रहा था, की मीरा ने अचानक उसके हाथ को हल्का सा दबा कर उसका ध्यान अपनी तरफ खींचा, और पानी  में बने दोनो के एक्स की तरफ इशारा करते हुए कहा देखो" कितने बूढ़े हो गए हैं हम दोनों" 
    तभी  जगजीत ने, शरारत करते हुऐ एक पत्थर पानी में फेंका, जिससे वो अक्स गायब हो गया। फिर हंसते हुए मीरा से   पूछा,
"कहां है वो अक्स,जिस में  बूढ़े दिख रहे  हम दोनों? 
  "ये तो हमारे जीवन की एक नई शुरुआत  है ठीक उसी तरह जिस तरह तुम दुल्हन बन कर  आई थी  मेरे जीवन में नए रास्ते पर चलने। 
  हम तब भी दो ही थे और देखो आज भी " 
तभी पीछे से आवाज आई "लो बाबूजी आपकी "दो चाय"।
दोनों एक साथ मुस्कुरा उठे मानो उनके जीवन की इस नई शुरुवात को किसी ने अपने हस्ताक्षर कर सत्यापित कर दिया था।


संजय आरजू" बड़ौतवी" की  कलम से


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