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S N Sharma

Tragedy

4  

S N Sharma

Tragedy

दिल का दाग (भाग 7)

दिल का दाग (भाग 7)

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जिस दिन जायदा और शाहिद का निकाह काजी साहब ने पढ़ाया था उस दिन आमिर इस बात को लेकर तो बहुत खुश था कि आप कि अब जो गलती उसने जायदा को तलाक दे कर की थी ,उसे सुधारने का पहला चरण तो पूरा हो गया है। उसे शाहिद मियां अनपढ़ जरूर लग रहे थे, पर उन्होंने इस निकाह के लिए कोई भी पैसे की मांग नहीं की थी। इस कारण उसे शाहिद मियां काफी समझदार और नेक इंसान नजर आ रहे थे।

आमिर का मन एक तरफ तो खुश हो रहा था की अब जायदा से मिलना ज्यादा से ज्यादा तीन महीने दूर है और उसमें भी इद्दत के समय में यदि जाहिदा से शारीरिक संपर्क भले ना हो पाए पर जायदा फिर से आकर कम से कम सर्वेंट क्वार्टर में तो रह सकेगी और उससे बातचीत तो होती रहेगी। हर रोज उसकी शक्ल तो दिखती रहेगी। ऐसे ही करके इद्दात का समय तो कट ही जाएगा।

जायदा को फिर से अपनी बीवी बना लेने की कल्पना मात्र से आमिर का रोम रोम खिल उठा। उसे जायदा की मोहब्बत की वह सारी बातें जो स्कूल के दिन से शुरू हुई थी और निकाह में आकर उसकी शरीके हयात बनके उसके साथ हम राह बन कर चल पड़ी थी ।चलचित्र की भांति याद आ रही थी। उसे याद आ रहा था जब वह कॉलेज में फाइनल ईयर के स्टूडेंट थे और एक बार पिकनिक पर गए थे तो वे दोनों एक दूसरे के हाथों में हाथ डाले हुए नदिया के किनारे काफी दूर तक निकल गए थे एकांत क्षणों में जैसे ही जायदा का पैर फिसला था वह एकदम आमिर की बाहों में आ गई थी और उसका पूरा शरीर आमिर के शरीर के ऊपर आकाश आकर गिर गया था आमिर ने उसे कसकर अपने सीने से लगा लिया था और जायदा ने भी पहली बार ,हां जीवन में पहली बार, बेसुध होकर उसके मुंह पर चुंबनों की झड़ी लगा दी थी। और तेज तेज सांसों के साथ वह दोनों अपनी मर्यादा को छोड़ ही देते यदि पीछे से लड़कियों का झुंड उन्हें बुलाने के लिए न आ गया होता ।

आंखों में गहरी प्यास लिए हुए वह दोनों अलग हो गए थे और उसके बाद आगरा के टूर के दौरान होटल में चांदनी रात में पहली बार जायदा और वह शारीरिक तौर पर एक दूसरे के हो गए थे ।कितने मादक और प्यारे क्षण थे वह। जिंदगी के वे सुनहरी लम्हे याद करके आमिर की आंखों में नन्ही सी चमक आ गई ।

अगले ही पल उसे लगा , कि आज यही सब शाहिद जायदा के साथ कर रहा होगा ।शायद उसी प्रकार उसी तरह से और जायदा भी कैसे शाहिद के साथ यह सब कर पा रही होगी।

आज आमिर का दिल बहुत बेचैन था उसे बेचैन करने के लिए यह ख्याल काफी था कि आज उसकी जायदा किसी और की बाहों में होगी उसे आमिर को निकाह के बाद की वलीमा वाली पहली रात याद आ रही थी और उसे याद आ रहा था जायदा का शर्मा का कर उसकी बाहों में सिमट जाना और पूरी रात जागकर एक दूसरे को देखते हुए प्यार की अगम गहराइयों में गोते लगाते रहना।

          आमिर के चेहरे पर उस घटना को याद करके हंसी आ गई,जब जायदा की एक मोटी नटखट लट उसके और जायदा के होठों के बीच आकर उसके ओंठ चूमने में अवरोध पैदा करती थी। वह बार-बार उस लट को हटाता और बार-बार झूलती हुई वह हठीली नटखट लट जायदा के होठों पर आकर रुक जाती थी ।जायदा की अंतरंग क्षणों की इस अदा को आमिर हमेशा याद करता था।

          आज वही जायदा जिसके तन, बदन और मन पर सिर्फ आमिर हक था और उसके अलावा जो किसी के सामने निर्वस्त्र नहीं हुई थी आज किसी और की बाहों में वही सब कर रही होगी जो आमिर और जायदा किया करते थे ।

यही विचार आमिर के दिमाग में बार-बार आकर उसे बहुत परेशान कर रहा था ।आज उसे अपनी गंदी जवान और शराब पर बहुत गुस्सा आ रहा था ,जिसके कारण आज जायदा की दुर्गति हो रही थी और आमिर की जिंदगी खराब हो रही थी। पर अब किया ही किया जा सकता था।

आमिर परेशानियों से झुंझलाता हुआ नींद आने से परेशान होकर बिस्तर छोड़ कर बाहर आकर टहलने लगा।

उसके दिमाग में रात को 3:00 बजे भी यही सब आ रहा था की जायदा और शाहिद अब क्या कर रहे होंगे। उसकी कल्पना उसे उन दोनों की रंगीनियों के अनेकों तरह के चित्र आंखों के सामने और दिमाग में प्रतिबिंबित कर रही थी । बेबस और लाचार सा अनुभव करता हुआ आमिर सिर दर्द के कारण बेहद परेशान हो रहा था।

           तभी आमिर को एक और चिंता सताने लगी। क्या होगा अगर शाहिद जायदा को तलाक ही ना दे ।फिर उसने सोचा जायदा तो अपनी तरफ से भी शाहिद को तलाक दे ही सकती है।

अगले ही पल फिर उसे लगा कि यदि जायदा ने भी किसी कारण से शाहिद को तलाक नहीं दिया तो आमिर क्या करेगा ।इस विचार मात्र से ही आमिर के माथे से पसीना बहने लगा ।आमिर जायदा को अपनी जान से भी ज्यादा प्यार करता था। पर उसके प्यार में अधिकार बाद था।

कई बार विवाह से पहले से ही वह जायदा पर बहुत गुस्सा होता था और उसे डांट फटकार कर उसे कई बार जलील कर देता था। इतना जलील कर दिया करता था की भोली भाली गुलाब की पंखुड़ी की बहुत ही कोमल स्वभाव की जायदा को तब सिर्फ रोना ही आता था और वह बैठकर रोती ही रहती थी जब तक की आमिर उसे खुद मनाने नहीं पहुंचता था।

अब यदि उसके गुस्सा और उसके शराब पीने के कारण यदि जायदा उसके पास अपने वर्तमान शोहर शाहिद मियां से तलाक लेकर नहीं आएगी तो वह क्या करेगा।

आमिर को ऐसा महसूस हो रहा था जैसे वह इन समस्याओं के मकड़ी के जाले के अंदर फस गया एक छोटा सा कीड़ा हो और परिस्थितियों की मकड़ी अपने नुकीले डंक लेकर बड़ी तेजी से उसे निगलने के लिए चली जा रही हो।

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शेष अगले भाग8 में।


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