धूर्त से यारी, भलों से गद्दारी
धूर्त से यारी, भलों से गद्दारी
विवेक पांच बहनों का इकलौता भाई था। विवेक और उसकी बहनों का बचपन लाड़ प्यार में और हँसते खेलते निकल गया। विवेक की सभी बहनें उससे बड़ी थीं, इसलिए सभी बहनों का विवाह हो गया।
अब विवेक की शादी की बारी आई। विवेक पढ़ा लिखा समझदार लड़का था। घर कारोबार में कोई कमी नहीं थी। इसलिए उसकी शादी भी अच्छे घर की लड़की एकता से हो गई।
शादी होते ही एकता ने झूठे प्यार का दिखावा करते हुए, विवेक को उसके भले माता पिता और बहनों से भावनात्मक रूप से दूर करना शुरू कर दिया। हर छोटी बात में एकता विवेक को उसके माता पिता और बहनों की गलतियां निकालकर दिखाने लगी।
धीरे धीरे, विवेक एकता की धूर्त बातों में आता गया। उसने अपनी बहनों को अपमानित किया और उनका उनके मायके आने जाने पर भी रोक लगा दी।फिर अपने माता पिता से भी बात करनी बंद कर दी।
अब एकता ने मौके का फ़ायदा उठाते हुए घर कारोबार विवेक से अपने नाम पर करवा लिये, जो पहले विवेक के नाम पर थे। अब विवेक मानसिक और आर्थिक रूप से पूरी तरह एकता पर निर्भर हो गया। "धूर्त से यारी, भलों से गद्दारी" तो भारी पड़नी ही थी।
