धमकी
धमकी
शादीके बादकी पहली होलीको लेकर रजनीगंधाबहुत उत्सुक थी। मन ही मन उसे लगा कि अबकी बार तो वो अपने पति कमलेश के साथ जी भरके होली खेल सकेगी।बचपनसे होलीके दिन अपनी सहेलियोंके साथ उसे भी होली खेलनेका बहुत मन करता था। चाहनेपरभी उसे होली खेलने नहीं दिया जाता था। अबकी बार होली खेलनेका सपना पुरा होगा ऐसा लग रहा था। क्योंकि इस साल वो अपने मायके नहीं बल्कि ससुरालमें थी।
वो एक बहुतही पारंपरिक परिवारसे संबंधित थी। उसके पिता होली खेलनेके खिलाफ थे। त्योहारपर घरमें मीठाईयाँ तो बनती थी पर घरका कोई भी सदस्य होली खेले उनको पसंद नहीं था। उनकी नजरमें होलीमें रंग खेलना निम्ऩ जातिके लोगोंका रिवाज माना जाता था। छोटी रजनीगंधा पापाकी बडी-बडी बातें समझ नहीं पाती। होलिका दहनकी शाम स्कूलसे घर आते समय वो बहुत बचते-बचाते घर आती थी क्योंकि उसके युनिफॉर्मपर फाउँटनपेन की स्याहीके दाग देखतेही उसके पापाका गुस्सेमें पारा चढ जाता था। जब कि ये दूसरे बच्चोंकी शरारत होती। पर सजा उसे मिलती उपरसे माँकी डाँट अलगसे खानी पडती क्योंकि उसे सफाई करनेमें तकलीफ होती थी। उसकी सहेलियाँ उसे बंद दरवाजे खिडकियोंके पीछेसे आवाज देकर होलीके दिन होली खेलने बुलाती भी थी। उसके मनमें भी होली खेलनेकी चाह बनी रही। पर जब तक मायकेमें थी उसका सपना,सपनाही बना रहा।
आज दस साल बाद , होलिका दहनका दिन, वो सोच रही थी शामको कमलेशके घर आनेके बाद वो उसे अपने मनकी बात बोलेगी। बडे उस्ताहसे उसने कमलेशके आनेतक खानेके साथ –साथ होलीकी मिठाईयाँ और नमकीन भी बना लिया और उसने होलिका दहनकी पूजामें जानेकी सारी तैयारियाँ भी कर ली।
उनकी कॉलनीमें भी होलिका दहनकी तैयारियाँभी बडे जोरो-शोरसे हो रही थी।
शामको कमलेशके घर आनेपर चायनाश्तेके बाद उसने होलिका दहनकी पूजामें चलनेके लिये कहा। तो वो चल पडा। होलिका दहनके बाद दोनों घर पहुँचे। खाना हो जानेपर वो अपने कमरेमें सोने चला गया। रजनीगंधाभी कीचनमें सबकुछ समेटकर जब कमरेमें आई तो उसे कमलेश बहुत अच्छे मुडमें नजर आया। उसने बडे उस्ताहसे बातचीत शुरु की। रजनीगंधाने कहा -" सुनो,जी कितना अच्छा होता अगर इस साल हम दोनों रंगबिरंगे रंगोसे होली खेले। बचपनसे मेरा सपना था कि मैं भी आम लोगोंकी तरह सबके साथ होली खेलुँ। मायकेमें कभी होली खेलनेका मौका ही नहीं मिला। पापा बहुत पुराने खयालोंके थे। उनको पसंद नहीं था। माँ से कहती, तो वो भी नहीं खेलने जाने देती। अपनी सहेलियोंको होली खेलते देख मुझेभी बहुत मन करता। पर माँ कहती -"अपने ससुरालमें जाकर जो जी में आये करना वहाँ कोई रोकने–टोकने नहीं आयेगा।" सुनकर बहुत बुरा लगता और बहुत दुखभी होता। मैं होली के गाने सुनकर और फिल्मोंमे होली खेलते देखकर मुझेभी मन करता। तब मैं सोचती, काश,मेरी शादी हो गई होती तो मे अपने पतिके साथ होली खेलती और मुझे रोकनेकी किसीकी हिम्मत नही होती। अब तो मेरी आपके साथ शादी भी हो गई है। यहाँ कोई सहेली नहीं है तो क्या हुआ? आप तो है, आपके साथ तो होली खेल ही सकती हुँ।"यह सुनकर जाने क्युँ कमलेशका मूड बिगड गया। उसने कहा "क्या कहा ? तुम्हें होली खेलनी है ? " रजनीगंधा अपनी भावनाऔमें इतनी खोई थी कि उसे कमलेशके बोलनेका लहजा भी समझ नहीं आया। वो सीधेपनमें बोली " हाँ , हाँ मुझे आपके साथ होली खेलनी है।" उसे सुनकर कमलेशको न जाने किस बात पर गुस्सा आया। उसने धमकी देते हुए कहा "खबरदार ,ऐसा सोचना भी मत, मैं और तुम्हारे साथ?कभी नहीं। "
रजनीगंधा सीर्फ होलीके मूडमें ही थी। उसपर इसबात का कोई असर नहीं था कि वो क्या कह रहा है। ये देख उसने उसकी चोटी जोरसे खींचकर कहा " क्या ? अब भी तुम होली खेलना चाहती हो, ?" उसके इस रवैयेसे रजनीगंधा जैसे होशमें आ गई।
उसके तेवर देखकर वो उसे देखती रह गई। वो गुस्सेमें लाल-पीला हुए जा रहा था। उसने फटकारते हुए कहा " खबरदार,अगर, रंग खेलने का नाम भी लिया तो ? वरना ऐसी होली खेलुँगा कि सारी जिंदगी भर याद रहेगी !" उसकी ये बात सुनकर रजनीगंधा बिना कुछ कहे चुपचाप सो गई।
दूसरे दिन सुबह उठकर देखा तो कमलेश बिस्तरपर नहीं था। छुट्टी होनेके बावजुदभी सुबह जल्दी उठकर न जाने कहां चला गया। उसे थोडी चिंता हुई पर उसकी धमकीकी वजहसे उसने किसीसे कोई पुछताछ करनेकी सोचभी नहीं पाई। वो रोजकी तरह अपने कामोंमें व्यस्त हो गई। कुछ देर बाद वो उसे अपने कामोंसे फुरसत मिलनेपर अपनी सहेलियोंको होलीकी शुभकामनाएँ भेजनेके लिए उसने मोबाईल फोन उठाया और सबको शुभकामनाएँ भेजी। फेसबुक जब उसने खोलकर देखा तो होलीकी बहुत सारी विडियोस वायरल हो रही थी देखते देखते वो हैरान हो गई जब उसने अपने पति कमलेशको अपनी गर्लफ्रेंडके साथ जमकर होली मनाते हुए देखा। उसका दिल बहुत बुरी तरह टुटा। उसे उसकी धमकीका मतलब अब समझमें आया । अगर वो उसके साथ होली खेलता तो गर्लफ्रेंडके साथ होली खेलनेके रंगमें भंग पड जाता जो वो नहीं चाहता। इसलिए उसे धमकी देकर वो चला गया। फिर कभी न लौटा।
