Read #1 book on Hinduism and enhance your understanding of ancient Indian history.
Read #1 book on Hinduism and enhance your understanding of ancient Indian history.

Rashmi Nair

Inspirational


3  

Rashmi Nair

Inspirational


कौओं की दावत

कौओं की दावत

3 mins 134 3 mins 134


       पितृपक्ष के दिन शुरु हो गये सारे कौए बहुत खुश हो गए । बढियाँ दावत के सपने देखने लगे । हर रोज सुबह होते ही ये सारे अपने घोसलों से निकलकर दावत के लिये निकल पड़ते । घरों की छत पर स्वादिष्ट पकवान सजे मिलते और ये सब खूब जी भरके खा पीकर खुशी से शाम तक अपने घौंसलो में लौटते ।

 ऐसा माना जाता है कि इन दिनों कौए के रुपमें पूर्वज धरती पर आते हैं और उनका परिवार उनकी याद में उनके लिये भोज का आयोजन करके उनकी आत्मा को संतुष्ट करता है ।

       

    सुधा आज सुबह से पूर्वज भोज की तैयारियों में लगी रही । उसने सबसे पहले पूर्वजों की तस्वीरें निकालकर उनकी पूजा कर ली । बारह बजे तक सारा खाना बनाकर भोग भी लगा दिया । उसे लेकर वो छत पर रख आई । उसका ध्यान वहीं लगा रहा । वो उपरी मंजिल की छत की दीवार लगे काँच के दरवाजे के पास कुर्सी लगाकर इस इंतजार में थी कब कौआ आयेगा और उसे छू जाए । एक बजे से शाम के चार बजेतक कौए के दर्शन भी नहीं हुए। अबतक भूख के मारे उसका बुरा हाल हुआ । अब और उससे इंतजार नहीं किया जा रहा था । पर उसने ये भी सुन रखा था ,जबतक कौआ, पूर्वजों के लिये रखे भोग को छूता नहीं तब तक किसीको खाना नहीं खाना चाहिये । यही सोचकर वो कुछ देर और इंतजार करने की सोचकर वहीं बैठी रही ।   


कुछ देर बाद दरवाजे पर बेल बजी ,सुधा दौडी़ नीचे आई और जाकर दरवाजा खोला ,देखा तो सामने उसकी सहेली शर्मिली थी । उसे देखकर सुधा बहुत खुश हो गई । दरवाजा बंद करके दोनो बातें करती हुई अंदर आई । सुधाने उसे बिठाकर पानी पिलाया । शर्मिली ने उसे पूछा खाना खाया तो उसने नहीं में जवाब दिया , सुनकर शर्मिला चौंक गई । उसने पूछा"क्या, चार बज गये तूने अबतक खाना नहीं खाया ?" " हां पूर्वजों का श्राद था , सब तो हो गया । भोग भी एक बजे ही छत पर लगा दिया मगर अबतक कौए ने छुआ नहीं । उसके छुए बिना हम कैसे खाना खा सकते हैं ।"सुधाने कहा । "बात तो तुम्हारी ठीक है पर,तुम कबतक ऐसे भूखी रहोगी ,सुधा ? जहाँतक मैं उनको जानती हुँ, सारी जिंदगीभर उन लोगों ने तुम्हें सीर्फ दुख और तकलीफ ही दी है । उसके बावजूद भी तुम हर साल उनके प्रति हर साल अपना फर्ज निभाती हो । सारी जिंदगी वो तुम्हारे खिलाफ ही थे । हर साल तुम इसीसतरह भूखी-प्यासी रहकर कौए का इंतजार करते भूखी रह जाती हो । मैं जानती थी ,इसलिये मैं आज खास तुमसे मिलने आई। सोचा तुम्हें कुछ खिलाकर जाऊं । " शर्मिली ने कहा । "पर शर्मिली , जबतक कौआ नहीं छूता,भोग नहीं पहुँचता । मैं कैसे खाना खा सकती हुँ ।" सुधा ने कहा । "देखो, मैं तुम्हें गलत सलाह नहीं दूँगी सुधा, पर ये भी समझो,कि अगर कलतक कौए ने नहीं छुआ तो या कौआ नहीं आया तो क्या तुम भूखी ही रहोगी । अगर रहोगी तो कबतक ? और क्यूँ रहोगी ? तुमने तो अपना फर्ज निभाया है,तुमने वो सबकुछ किया जो तुम्हें करना था ,अगर कौए ने नहीं छुआ तो तुम्हारी क्या गलती है ? तुम आजके जमाने पढी लिखी हो । पंरपराओ को मानना चाहिये पर उनका दास नहीं बनना चाहिये । चलो,अब किचन में चलो और खाना खाते हैं , चलो मुझे भी जम के भूख लगी है ।" अरे तुमने भी अबतक खाना नहीं खाया ।" सुधाने पूछा । " नहीं, तुम्हारे बिना कैसे खा सकती हुँ । शर्मिली कहा । " चल, चल, जल्दी दोनों साथमें खाना खाते हैं । "कहकर उसका हाथ पकडकर सुधा उसे खाना खिलाने किचम नें ले जाती ।




 



Rate this content
Log in

More hindi story from Rashmi Nair

Similar hindi story from Inspirational