डिजिटल विवाह
डिजिटल विवाह
शर्मा जी ने चश्मा नाक पर टिकाया और मोबाइल स्क्रीन को घूरने लगे। वॉट्सऐप पर एक चमचमाता हुआ डिजिटल कार्ड आया था। नीचे लिखा था—"समर वेड्स सिमरन: ए मेटावर्स वेडिंग एक्सपीरियंस"।
शर्मा जी ने गहरी सांस ली और अपनी पत्नी विमला को आवाज दी,
"अरे सुनती हो, हमारे कलीग वर्मा जी के बेटे समर की शादी का न्योता आया है। लेकिन कार्ड के साथ न कोई मिठाई का डिब्बा है, न हल्दी का पीला चावल। बस तीन लिंक और दो क्यूआर (QR) कोड हैं।"
विमला रसोई से हाथ पोंछते हुए आईं, "चलो अच्छा है, इस बार बनारस जाने की भागदौड़ से बच गए। वैसे इस लिंक में क्या-क्या है?"
शर्मा जी ने पहले लिंक पर क्लिक किया। स्क्रीन पर दूल्हा-दुल्हन के एनिमेटेड अवतार (Avatar) नाचते हुए दिखाई दिए। नीचे लिखा था: 'क्लिक हियर टू जॉइन वर्चुअल बारात'।
"लो बताओ विमला!" शर्मा जी हंसते हुए बोले, "अब बारात में नाचने के लिए हमें अपने लिविंग रूम में ही थिरकना पड़ेगा। और यह देखो, दूसरा लिंक यूट्यूब लाइव का है, जिससे हम सात फेरे सीधे देख सकेंगे।"
"और इन क्यूआर कोड्स का क्या करना है?" विमला ने उत्सुकता से पूछा।
शर्मा जी ने चश्मा साफ करते हुए पढ़ा,
"पहला क्यूआर कोड 'शगुन' के लिए है। इस पर स्कैन करके डिजिटल लिफाफा (गूगल पे या फोन पे) सीधे दूल्हा-दुल्हन के जॉइंट अकाउंट में ट्रांसफर हो जाएगा।
और दूसरा क्यूआर कोड 'आरएसवीपी' (RSVP) के लिए है। अगर हमने इस पर अपनी उपस्थिति कन्फर्म की, तो हमारा 'रिटर्न गिफ्ट' ब्लिंकिट या डिलीवरी कूरियर के जरिए सीधे हमारे घर पहुंच जाएगा।"
शादी वाले दिन, शर्मा जी और विमला शाम को तैयार होकर सोफे पर बैठ गए। उन्होंने टीवी पर यूट्यूब लिंक को कास्ट कर लिया। स्क्रीन पर शादी का भव्य मंडप दिख रहा था, जिसे किसी हाई-टेक स्टूडियो में डिजाइन किया गया था। मंत्रोच्चार गूंज रहे थे, लेकिन वहां न तो मेहमानों की भीड़ थी और न ही हलवाइयों की कढ़ाही से उठती महक।
वर्मा जी (दूल्हे के पिता) स्क्रीन पर आए और कैमरे के सामने हाथ जोड़कर बोले, "आप सभी का हमारी इस 'स्मार्ट वेडिंग' में स्वागत है। समय की कमी और ट्रैफिक को देखते हुए हमने आप सभी का कीमती वक्त बचाया है। कृपया स्क्रीन पर दिख रहे क्यूआर कोड को स्कैन कर बच्चों को अपना आशीर्वाद और शगुन भेजें।"
शर्मा जी ने तुरंत अपना फोन निकाला, क्यूआर कोड स्कैन किया और ₹2100 का डिजिटल शगुन ट्रांसफर कर दिया। जैसे ही पैसे ट्रांसफर हुए, टीवी स्क्रीन पर एक पॉप-अप चमका—'शर्मा अंकल की तरफ से ₹2100 का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। धन्यवाद!'
विमला ने सिर पकड़ लिया, "हे भगवान! अब तो दुआएं और आशीर्वाद भी रसीद की तरह स्क्रीन पर छप रहे हैं।"
फेरे पूरे हुए, कसमों-वादों का आदान-प्रदान हुआ। दूल्हा-दुल्हन ने कैमरे के सामने हाथ जोड़कर सभी वर्चुअल मेहमानों को धन्यवाद कहा। रात के ठीक 9:30 बजे, शर्मा जी के घर की डोरबेल बची।
विमला ने दरवाजा खोला तो सामने कूरियर वाला खड़ा था। उसके हाथ में एक खूबसूरत बॉक्स था। बॉक्स पर लिखा था—'समर और सिमरन की तरफ से रिटर्न गिफ्ट और प्री-पैक्ड डिनर। थैंक यू फॉर अटेंडिंग आवर वर्चुअल वेडिंग!'
बॉक्स के अंदर काजू कतली, एक चांदी का सिक्का और एक क्यूआर कोड था, जिसे स्कैन करते ही कूरियर कंपनी की तरफ से गरमा-गरम खाना डिलीवर करने वाले रेस्टोरेंट का मेन्यू खुल जाता था।
शर्मा जी ने सोफे पर टेक लगाते हुए कहा, "देखा विमला! न बस की टिकट करानी पड़ी, न होटल का खर्चा, न सजने-धजने की आफत। घर बैठे-बैठे शादी भी हो गई, शगुन भी पहुंच गया और खाना भी घर आ गया।"
विमला ने बॉक्स से काजू कतली का टुकड़ा निकाला और मुंह में डालते हुए उदास स्वर में कहा, "सब कुछ तो आ गया शर्मा जी... पर वो शादी वाले घर की रौनक कहां से लाओगे? वो चाची-मौसी की गप्पें, वो दोस्तों की टांग खिंचाई, वो शहनाई की गूंज और वो पूड़ियों की महक... क्या इस कूरियर के डिब्बे में वो सब मिल पाएगा?"
शर्मा जी के हाथ में थमा मोबाइल अचानक शांत हो गया था। टीवी स्क्रीन भी अब ब्लैक हो चुकी थी। तकनीक ने दूरियां तो मिटा दी थीं, लेकिन इंसानी रिश्तों की वो गर्माहट, जो सिर्फ गले मिलने और साथ हंसने से आती है, वह उस 5G के नेटवर्क में कहीं खो गई थी।
शर्मा जी ने विमला की बात सुनकर गहरी सांस ली। वह कुछ कहने ही वाले थे कि तभी उनके मोबाइल की घंटी बजी। स्क्रीन पर दूल्हे राजा यानी समर का नाम चमक रहा था। शर्मा जी ने तुरंत वीडियो कॉल रिसीव किया।स्क्रीन पर समर और सिमरन शादी के भारी जोड़ों में सजे-धजे दिख रहे थे, लेकिन उनके पीछे का बैकग्राउंड अब एक सादा सा स्टूडियो था, जहां क्रू मेंबर्स कैमरे और लाइट्स समेट रहे थे। दोनों के चेहरों पर शादी की खुशी से ज्यादा थकान साफ नजर आ रही थी।
"नमस्ते शर्मा अंकल, नमस्ते आंटी!"
समर ने जबरदस्ती मुस्कुराते हुए कहा,
"शगुन के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। स्क्रीन पर आपका नाम देखकर पापा बहुत खुश हो रहे थे।
"विमला जी तुरंत मोबाइल के कैमरे के करीब आईं और बोलीं, "सदा खुश रहो बेटा! पर एक बात बताओ, तुम दोनों अपनी ही शादी में इतने थके हुए और अकेले क्यों लग रहे हो? कोई दोस्त या रिश्तेदार आसपास दिखाई नहीं दे रहा।"सिमरन ने एक फीकी मुस्कान के साथ जवाब दिया,
"आंटी, सच कहें तो हम दोनों बहुत ज्यादा 'लोनली' फील कर रहे हैं। समर और मेरी नौकरी यूएस (US) की एक टेक कंपनी में है। हमें सिर्फ चार दिन की छुट्टी मिली थी। अगर हम बनारस आते, तो दो दिन तो आने-जाने और जेट लैग में ही निकल जाते। शादी की रस्में, रिश्तेदारों की खातिरदारी और लॉजिस्टिक्स संभालने में ही छुट्टियां खत्म हो जातीं।
"समर ने सिमरन की बात को आगे बढ़ाते हुए कहा,
"हां आंटी, यह हमारा फैसला नहीं, बल्कि हमारी मजबूरी थी। आज की इस भागदौड़ वाली लाइफ में हमारे पास वक्त ही नहीं है। हमने सोचा कि क्यों न इस तकनीक का फायदा उठाया जाए। कम से कम हमारे माता-पिता को इस उम्र में भागदौड़ और शादियों के भारी-भरकम इंतजामों का तनाव तो नहीं झेलना पड़ा।"
"वो तो ठीक है बेटा,"
शर्मा जी बीच में बोलते हुए बोले,
"लेकिन शादी तो जिंदगी में एक ही बार होती है। क्या तुम्हें नहीं लगता कि तुमने अपने जीवन के सबसे बड़े उत्सव को एक 'कॉरपोरेट इवेंट' या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की तरह निपटा दिया? कल को जब तुम अपनी शादी की एल्बम देखोगे, तो उसमें सिर्फ स्क्रीनशॉट्स और व्यूज के आंकड़े होंगे, अपनों की वो हंसती-खिलखिलाती तस्वीरें नहीं।
"सिमरन की आंखें थोड़ी नम हो गईं,
"अंकल, आपकी बात शत-प्रतिशत सच है। जब फेरे हो रहे थे, तो मंडप में सिर्फ मंत्रों की आवाज थी, किसी की सिसकी या कोई भावनात्मक माहौल नहीं था। विदाई के वक्त भी मेरी मम्मी रो रही थीं, लेकिन स्क्रीन के उस पार। मैं चाहकर भी उनके आंसू नहीं पोंछ पाई और न ही वो मुझे गले लगा सकीं। डिजिटल दुनिया ने हमारा काम तो आसान कर दिया, पर हमारे इमोशंस को एक 'लाइक' और 'इमोजी' तक सीमित कर दिया।"समर ने सिमरन का हाथ थामते हुए कहा, "शायद यह आधुनिकता की वो कीमत है, जो हमारी जनरेशन को चुकानी पड़ रही है अंकल।
हमने पैसे और समय तो बचा लिए, लेकिन यादों का वो खजाना खो दिया जो ताउम्र हमारे साथ रहता।
"कुछ देर और बातें करने के बाद समर और सिमरन ने प्रणाम किया और कॉल कट गया।
कमरे में एक बार फिर सन्नाटा छा गया। विमला जी ने कूरियर से आए उस खाने के डिब्बे को देखा और फिर शर्मा जी की तरफ मुड़कर बोलीं,
"सुना आपने? बच्चे भी खुश नहीं हैं। तकनीक चाहे कितनी भी आगे बढ़ जाए शर्मा जी, पर वो इंसान के हाथ के स्पर्श, अपनों के आंसुओं की गर्माहट और कंधों पर रखे भरोसे के हाथ की जगह कभी नहीं ले सकती।"शर्मा जी ने अपना चश्मा उतारा और मेज पर रख दिया।
उन्होंने मोबाइल को साइलेंट मोड पर डाला और विमला से बोले, "चलो विमला, खाना खा लेते हैं। और हां, कल सुबह सबसे पहले हम खुद वर्मा जी के घर जाएंगे। स्क्रीन पर तो बधाई दे दी, पर कल उन्हें गले मिलकर बधाई देंगे। आखिरकार, कुछ चीजें डिजिटल नहीं, सिर्फ दिल से ही पूरी होती हैं।"
