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Surya Rao Bomidi

Inspirational

4  

Surya Rao Bomidi

Inspirational

"बस थोड़ समय"

"बस थोड़ समय"

2 mins
4


गोपाल जी और सरोजा देवी की शादी को 42 साल हो चुके थे। दोनों ने मिलकर छोटी सी किराने की दुकान चलाई, बेटे रोहन को पढ़ाया, कर्ज लेकर उसको विदेश भेजा। सपना बस एक था - रोहन बड़ा होकर उनके बुढ़ापे का सहारा बनेगा।


रोहन की नौकरी अमेरिका में लग गई। दो साल बाद उसने फोन पर कहा, "पापा, मम्मी, अब आप दोनों यहीं आ जाओ। मैं आप लोगों को अपने पास रखूंगा।" 
गोपाल जी हँसकर बोले, "बेटा, हम अपनी मिट्टी छोड़कर कहाँ जाएंगे। यहीं अपने घर में, अपने लोगों के बीच ठीक हैं। तुम खुश रहो, बस इतना ही काफी है।"


समय बीता। रोहन की नौकरी, पत्नी, बच्चे सब सेट हो गए। भारत आना कम हो गया। एक दिन रोहन ने कहा, "पापा, अब आप अकेले रहकर क्या करोगे। मैं एक अच्छा सा रिटायरमेंट होम देख आया हूँ। वहाँ डॉक्टर, खाना, सब सुविधा है। आप दोनों वहीं शिफ्ट हो जाओ।"


सरोज देवी की आँखें भर आईं। गोपाल जी ने सिर्फ इतना कहा, "ठीक है बेटा, जैसी तेरी मर्जी।"


रिटायरमेंट होम के कमरा नंबर 12 में गोपाल जी और सरोजा देवी रहने लगे। दीवार पर बेटे की बचपन की एक फोटो टंगी थी। सरोजा देवी रोज शाम को गेट की तरफ देखतीं, "शायद आज आ जाए।" पर फोन महीने में एकाध बार आता।


फिर एक सर्दियों की शाम। फोन बजा। रोहन की आवाज आई, "पापा, कैसे हो आप दोनों? तबीयत ठीक है न? कोई दिक्कत तो नहीं? कुछ चाहिए हो तो बताना।"


गोपाल जी ने फोन को थोड़ा कस कर पकड़ा। सामने सरोजा देवी की आँखों में उम्मीद थी। कमरे में दवाइयों की गंध, बाहर लॉन में दूसरे बुजुर्ग टहल रहे थे।


गोपाल जी धीरे से बोले, 
"बेटा, तेरा दिया हुआ सब कुछ है हमारे पास। अच्छा कमरा है, समय पर खाना मिलता है, डॉक्टर भी आते हैं। पैसों की कोई कमी नहीं। 
बस... बस कभी-कभी अपने बूढ़े माता-पिता को थोड़ा समय दे। हमको सामान नहीं चाहिए बेटा, तेरी आवाज चाहिए। तेरा हाथ हमारे सिर पर चाहिए।"


फोन के दूसरी तरफ कुछ सेकंड सन्नाटा रहा। रोहन की आँखें नम थीं। उसने कहा, "पापा... मैं अगले महीने आ रहा हूँ।"


गोपाल जी ने फोन रख दिया और सरोज देवी का हाथ थाम लिया। बाहर सर्द हवा थी, पर कमरा नंबर 12 में आज पहली बार गर्माहट थी।



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