Shayar Ankit Tripathi

Tragedy


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Shayar Ankit Tripathi

Tragedy


द लास्ट मीटिंग

द लास्ट मीटिंग

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बेहतरीन किरदार अक्सर कहानियों को ज़िंदा रखते है, Practically, अगर किरदार एक कलम है तो वो हमारे दिल और दिमाग पर कहानी का स्केच बखूबी तैयार कर देते हैं...

शायद मेरी ये कहानी इतनी बड़ी तो नहीं लेकिन इतना जरूर कहूंगा की ये कहानी दिल पर स्केच बनाने में जीत गई।

तो यह कहानी तब की है जब मेरी जीती जागती Love Story ठीक-ठाक ही चल रही थी....उसकी शादी की तारीख काफी करीब आ चुकी थी, वो मेरे ही शहर में अपने रिश्तेदार के यहां रह रही थी लेकिन उसकी शादी गांव से होनी थी इसीलिए उसे अब गांव भी जाना था।

हमारा देश भी कई तरह के बेहतरीन रीति रिवाज को लेकर चलता है और उन्हीं रिवाजों को जो की शादी के पहले होते हैं उन्हें पूरे करने के लिए गांव भी जाना था...और उसी वक्त मेरे College ka Entrance Exam भी होना था...मतलब दो दो टेंशन मुझे एक साथ मिल रहे थे...कॉलेज में एडमिशन की लगभग सारी dates निकल चुकी थी, बस ये लास्ट डेट थी..जिससे मैं एग्जाम देकर एडमिशन ले सकता था....उसकी शादी की डेट्स तो मुझे याद थी लेकिन एग्जाम की वजह से मैंने personal Life से थोड़ा किनारा कर लिया। हालांकि मुझे दोनों बहुत जरूरी लग रहे थे।

एक दिन दोपहर में उसका कॉल आया कि - मिलना है।

काफी चिंता में लग रही थी , इतना कह कर उसने फोन रख दिया।

एग्जाम के कारण मैंने पहले तो इतना ध्यान नहीं दिया लेकिन उसके टेंशन में होने की वजह से मैं भी टेंशन में आ गया...जिस दिन उससे मिलना था उसी के अगले दिन शाम को मेरी ट्रेन थी जहां मेरा एग्जाम होना था।

मैंने उस दिन शाम को वक्त निकाल कर उससे मिलने चला गया...अंधेरा हो गया था मैं उसके कमरे तक पहुंचता इससे पहले ही उसने मुझे सीढ़ियों तक पकड़कर ले आई और जोर से गले लगी....जब उसके आंसू मेरे कंधे पर गिरे और उसकी सिसकियां सुनाई दी तो मैंने उसके सिर पर हाथ फेरते हुए पूंछा - क्या हुआ ?

उसने कहा - कुछ नहीं, कल गांव जाना है।

वो शादी....

इतना उसका कहना है था कि....मैं भी रो पड़ा।

कसम से, उस वक्त मुझे उस मुहावरे पर बहुत गुस्सा आया - अरे लड़के रोते हैं क्या।

उस वक्त मुझे एहसास हुआ कि - हां यार, लड़के भी रोते हैं और मेरा रोना भी तो जायज़ था न मैं उस शख्स को खोने जा रहा हूं जिसे हर वक्त हर पल सोते जागते बस उसे ही दुआ में मांगा।

हर वक्त यही दुआ करता खुदा से की अगर मुझे कुछ देना ही है तो उस शख्स को मेरे नसीब में लिख दो...और कुछ मत दो।।

तो हम दोनों का रोना जायज़ था।

बस उसने फिर यही कहा कि तुम टेंशन मत लेना और एग्जाम ठीक से देना।

उसकी एक ख्वाहिश हमेशा से रही की अगर मैं किसी भी competition में हिस्सा लेता हूं तो उस जीत में मेरा नाम जरूर होना चाहिए।

काफी देर तक हम साथ बैठे रहे...मैं बस उस पल को कैद करना चाहता था..!

ताकि मैं कभी उसे भूल न सकूं।

बस उसका बनकर मेरी ये last meeting थी उससे...और उसके बाद वो किसी और का हो गया और मैं आज भी सिर्फ उसी का कहा जाता हूं।


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