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Preeti Sharma "ASEEM"

Abstract Classics Inspirational

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Preeti Sharma "ASEEM"

Abstract Classics Inspirational

चुनाव

चुनाव

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चुनाव पात्र: 1.अवनी (25 वर्ष की जागरूक महिला) 2.शुकुंतला (अवनी की सास) 3.रानी (घरों में काम करने वाली) दृश्य 1 चुनावों की तिथि नज़दीक (वोट मांगने समूहों में जाते लोग... कभी एक पार्टी तो कभी दूसरी पार्टी के लोग चले हुए हैं ।सारा दिन कभी यहां बैठते कभी कहीं बैठते, हर कोई चुनाव की बातें कर रहा है। (डोर बेल बजते हुए) सविता( एक चुनाव प्रत्याशी)- इस बार अपने वार्ड का ख्याल रखें.. कोई काम हो तो बताएं..अपना आशीर्वाद दे दीदी। (डोर बेल बजते हुए) मदनलाल(एक चुनाव प्रत्याशी)- आंटी जी ...बस अपनी वोट का आशीर्वाद दे। (डोर बेल बजते हुए) अवनी(मन ही मन में) : डोर खोलते हुए( आज तो सुबह से 10 बार डोर बेल बज चुकी है । इससे पहले अवनी कुछ पूछती .... अंदर से उसकी सांस की आवाज़ आई । आ ...गी रानी..... क्या हुआ आज इतनी देर क्यों हो गई। रानी: (आंटी से) -बस सविता दीदी के साथ गई थी , आज उन्हें चुनाव चिन्ह मिल गया था ।वार्ड नंबर 5 के सारे घरों में उनकी पर्ची देने के लिए गई थी । अवनी की सांस(रानी से) -किसका जो़र है... इस बार रानी ...रानी को टटोलते हुए। आंटी जी... बस आंटी जी ज्यादा तो पता नहीं..... कह कर... रानी शुरू हो गई वार्ड नं एक से लेकर पंद्रहा तक के हर मैबर की रिपोर्ट देने लगी... रानी -आंटी जी वार्ड नं एक से नंद नाई ,मोहना हलवाई, रहीम शेख दरजी ख़डा है।तीनों में काटें की टक्कर है। पर नंद नाई ही जीतेगा। हर किसी की खबर रखता है ।बड़ा अच्छा है हर किसी के दुख -सुख में जाकर बैठ जाता है । अवनी (सुन कर मन ही मन) इतना ....वेहला(पंजाबी भाषा का शब्द जिसका अर्थ है जिस व्यक्ति को कोई काम न हो) उसे कोई काम नहीं है । अवनी(सांस की आवाज़ ) अवनी एक कप चाय तो बना दे.... रानी के लिए । अवनी(अपने मन में ही सोचती हुई ) काम अभी बीच में ही है और अब यह चाय पीते हुए घंटा लगा देगी, हमसे तो अच्छी रानी है जिसको पहले चाय पिलाओ फिर काम करेगी वो भी अगर मन किया। लेकिन अब तो मामला काफी गर्म है काम से ज्यादा अब सारे शहर की गरमा -गरम खबर हर टीवी चैनल से पहले रानी के मुंह से सुनने को मिलनी है । (अवनी की सांस) रानी से बोली -सुरेंद्र वकील के घर से इस बार कौन खड़ा है। नहीं.... आंटी जी कोई नहीं..... इस बार तो कोई और ही खड़ा है उस वार्ड से, पिछले इलेक्शन के बाद जीत कर, किसी का कोई काम नहीं किया। हमारी गली में ऐसे गढ्ढे पड़े हुए है।बारिश में सारा गंदा पानी घरों में आ जाता है। बस जीत कर फिर इनको ...पूछना नहीं होता कि हमारी क्या समस्या है ।बस अपना पैसा बटोरने में लग जाते हैं । (डोर बेल बजती है) .... अवनी दरवाज़ा खोलती है।कचरा इकट्ठा करने वाले भैया को देख कर डस्टबिन लेकर आती है। भईया नई यूनीफार्म ......जी दीदी इलेक्शन आने वाले हैं ना.... तो आज हमें नई यूनीफार्म निकाल कर दी है कमेटी वालों ने। दीदी ग्लव्स भी मिलते हैं लेकिन कोई हमें देता ही नहीं। अवनी( मन ही मन में सोचती हुई)ऐसा भी होता है... इधर रानी नॉन स्टॉप एक के बाद एक प्रत्याशी की कुंडलियां खोल रही थी ।वार्ड नंबर बारह से ब्राह्मणा की बहू सवर्णा खड़ी हो रही है । (शुकुंतला अवनी की सास ) रानी से ....क्यों इस बार उसका पति नहीं खड़ा होगा । रानी- नहीं ...लोग कह रहे थे पिछली बार उसने बहुत खाया है। तो इस बार खुद खड़ा न हो कर बहू को खड़ा कर रहा है ।ताकि उसके पीछे ,उसको आगे खड़ा करके फिर से अपनी लूट चालू रख सके। अवनी (रानी की बातों पर मन ही मन विचार करते हुए)... रानी से पूछा- इन लोगों के भी क्या दिमाग है। घर -घर जाकर हमें वोट डाल दो हमें वोट डाल दो..... सारा दिन यह लोगों की बातें ही करते हैं । जो औरतें इलेक्शन में खड़ी है ।इनका खाना कौन बनाता होगा..... हमारे घर में काम सारा दिन खत्म नही होता। इनको अपने घर का कोई काम नहीं होता उनका खाना कौन बनाता है ,इनके घर के काम , उनके बच्चे उनके काम कौन करता है उनकी तरह हम कहीं जाए तो हमारा तो एक दिन में,सारा घर ही उलट- पलट हो जाता है। तो यह सब इनका कोई काम नहीं होता खड़ा । रानी: दीदी आप भी ....यह लोग तो इलेक्शन से पहले भी घर का कोई काम न करें। शुकुंतला- (रानी से )विजय सुनयारा वह भी जीत ही जाएगा ।सुना है....कल रात घर -घर जाकर उसने सोने की अंगूठियां बांटी है।कल रात लछमी बता रही थी ।चार गाड़ी शराब की घर आई है जीत ही जाएगा। ठाकुर जियाराम ठाकुर केहर सिंह के बीच भी इस बार कड़ा मुकाबला है। कांग्रेस बीजेपी का भी है जीतेगी तो बीजेपी कांग्रेस को कौन-कौन पूछता है दूसरा यह कांग्रेस वाले खुद ही एक दूसरे की टांग खींच-खींचते रहते हैं। यह दोनों अपनी दुश्मनी निभाने के लिए खड़े तो हो जाते हैं फिर ठाकुर, ठाकुर में कौन ठाकुर किसको वोट डालेगा। अब वोट बट जाएगी। अवनी:(मन ही मन )हमारे देश का क्या हाल हो गया है गैस, पेट्रोल के रेट दिन चौगुनी बदल जाते हैं इनको अभी भी कांग्रेस, बीजेपी की लड़ाई पड़ी है। यह नहीं देखते कि कौन क्या कर रहा है। अंधभक्त होकर देश को खड्डे में ,धर्म -धर्म के नाम पर बांट रहे हैं। पता नहीं कौन -सा विकास आया है इंसानों में ; राहुल गांधी के सच लाने के हर प्रयास को यह सारे राजनीतिक बूढ़े मिलकर झूठा साबित कर रहे हैं। अब तो ईवीएम मशीन का भी भरोसा नहीं रहा है। रानी (शुकुंतला से )(चाय का कप उठा कर उठते हुए) -आंटी जी कोई भी जीते हमें तो किसी ने पूछना नहीं है ।पिछली बार हरे कार्ड बने थे ।लेकिन हमारा किसी ने नहीं बनवाया जिन लोगों के पास सब था उन्होंने अपने कार्ड बनवा लिए और सारा राशन यूपी ,बिहार के रहने वालों को कम रेट करके बेच देते हैं। और खुद अच्छी दुकानों से सामान ले लेते हैं ।हमारा तो क्या ही सुधरेंगे सब अपनी जेब भरेंगे । अवनी (मन ही मन ) - अब तक लगभग सभी वार्ड की चर्चा वह कर चुकी थी।चाय भी खत्म हो गई थी।मम्मी जी भी अपनी जानकारी से उसकी जानकारी को टेली कर चुकी थी ।ताकि वह भी कीर्तन में जाकर अपनी सहेलियों को बता सके कि किसका पलड़ा भारी है ।अब हर तरफ इलेक्शन की ही चर्चा थी अवनी (मन ही मन सोच रही थी )..... हमारा लोकतंत्र किस दिशा में जा रहा है यहां एक और शिक्षा के क्षेत्र का विस्तार हो रहा है। नवयुवकों का एक बड़ा प्रतिशत बेरोजगारी से जूझ रहा है। जहां आए दिन देश में बेरोजगारी, महंगाई के लिए संघर्ष जारी है। भ्रष्टाचार के चलते जहां शिक्षा का स्तर गिर रहा है। और पेपर लीक हो रहे हैं शिक्षा संस्थानों में चल रही धांधली से आए दिन कितने ही विद्यार्थी मौत का ग्रास बन जाते हैं ।और जब वोट का प्रश्न आता है तो यह युवा वर्ग अनपढ़ लोगों के हाथ में अपने जीवन और भविष्य की डोर कैसे थमा देते हैं। क्या चुनाव लड़ने के लिए कोई विशेष योग्यता शिक्षा नहीं होनी चाहिए.....रिटायरमेंट.... कोई आयु सीमा निश्चित नहीं होनी चाहिए। क्या युवा कभी सोचेंगे या मोबाइलों के नशे और अपनी छोटे-छोटे हितों के लिए एक समाज के दायित्वों को भूल जाएंगे इसी उधेड़बुन में..... डोर बेल बजते ही उसका ध्यान भटका..... मम्मी जी अब फोन पर रानी की बातों की चर्चा कर रही थी। डोर खोलते ही...... नमस्ते भाभी जी यह आप सभी के वोट नंबर कार्ड है ।बस हमारी पार्टी को याद रखें। हां में सर हिलाया और अंदर आ गई। जहन में उठे हुए सवाल अभी भी उस से जवाब मांग रहे थे।


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