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Kumar Vikrant

Comedy Drama


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Kumar Vikrant

Comedy Drama


चिमटा दास का खजाना

चिमटा दास का खजाना

9 mins 413 9 mins 413

अंधेर नगरी 

ये रामानुजन जैसे गणितज्ञ का दुर्भाग्य ही था की आज वो शक्तिमान जैसे मूर्ख के चक्कर में पड़कर अंधेर नगरी में आ फंसा था।

एक हफ्ते पहले 

"रामानुजन जी हम दोनों ने बहुत दिन गरीबी में गुजार लिए, तुम्हे गणित रोटी न दे सका और मुझे मेरी सुपर पावर रोटी न दे सकी अब हम ५० के पार हो चले है; अब न कोई तुम्हें पूछने वाला और न ही मुझे पूछने वाला, अब तो कोई हमें नौकरी भी नहीं देगा। बुढ़ौती हमें अनेकों बीमारियों का तोहफा देगी और दवा दारू का पैसा भी हमारे पास नहीं है, इसलिए बेहतर है अपनी जान बीमारियों से गवाने की बजाय ऐसे काम को करते हुए गवाएं जो हमें धन और दौलत दे।" शक्तिमान ने उस दिन रामानुजन जैसे गणितज्ञ को समझाते हुए कहा था।

"कौन सा काम है जो हमें धन और दौलत देगा?" रामानुजन ने उस दिन अपने फटे कोट की तरफ देखते हुए पूछा था।

"चिमटा दास के खजाने की खोज........" शक्तिमान उत्साह से बोला।

"क्या बकवास है......मैंने ऐसे किसी खजाने के बारे में आज तक नहीं सुना......." रामानुजन ने कहा था।

"खजाना है......और उस खजाने तक पहुँचने का नक्शा मुझे मिल गया है........" शक्तिमान बोला था।

"तो जाओ लूट लो उस खजाने को.....मेरे सिर में क्यों दर्द कर रहे हो?" रामानुजन थोड़ा गुस्से में बोला था।

"तो तुम ये समझते हो कि मैंने कोशिश नहीं की? अरे भाई कोशिश की है मैंने और जूते खा कर वापिस आया हूँ......." शक्तिमान रुवासे स्वर में बोला था।

"किसने मारे थे तुम्हें जूते?"

"अरे भाई वो खजाना एक तिलस्म में रखा है, वहाँ तिलस्म में गणित के ऐसे-ऐसे सवाल दे रखे है कि पूछो मत.....जो सवालों का जवाब दे दे उसे आगे बढ़ने का रास्ता मिल जाता है........नहीं तो बेभाव जूते पड़ते है।"

"समझा कोई बुद्धिमान आदमी उन सवालों को सरल करके उस खजाने तो पहुँच सकता है......."

"नहीं ऐसा नहीं है तिलस्म के दरवाजे तो बुद्धिबल से खुलेंगे लेकिन बाकी काम पशुबल से होगा।"

"जैसे?"

"जैसे कोई दरवाजा बुद्धिबल से खुला तो आगे बढ़ने के लिए किसी भारी पत्थर को उठाना होगा या किसी सांड से लड़ना होगा........."

"अच्छा तुम्हें उस खजाने को ढूँढने के लिए किसी बुद्धिबल वाले आदमी की तलाश है पशुबल तो तुम्हारे पास है ही......"

"क्या बेकार की बात करते हो; तुम्हारे पास तो बुद्धिबल है लेकिन मेरे पास बुद्धिबल और पशुबल दोनों है......."

"तो खजाना क्यों नहीं ला सके?"

"अरे भाई मैं सिर्फ जोड़-घटा के सवाल कर सकता हूँ......ये भाग और वर्गमूल के सवाल मुझसे नहीं होते है......."

"एक बात बता कोई खजाना भी है या नहीं या बस ऐंवे ही लोगों को उलझने का तिलस्म बना रखा है?"

"कैसी बात करते हो? चिमटा दास के पास हजारों चिमटे थे जिनमें सोने और चाँदी के चिमटों के ढेर थे, उन्हीं चिमटों तक पहुँचने का नक्शा है ये......"

"ये खजाना है कहाँ?"

"बौड़मदास के दर्रे में......"

"क्या बकवास है.......बौड़मदास का दर्रा तो अंधेर नगरी में है......वहाँ जाकर बात बे बात पर फाँसी चढ़ने से अच्छा है यहीं गरीब रहो लेकिन जिंदा रहो......"

"अंधेर नगरी से मैं अपनी सुपर पावर से निपट लूँगा.........ऐसी की तैसी अंधेर नगरी और वहाँ के चौपट राजा की।" शक्तिमान ने यही कहा था उस दिन लेकिन आज सुबह जब वो दोनों उड़ते हुए बौड़मदास के दर्रे की तरफ जा रहे थे तो अंधेर नगरी के सैनिकों ने उन्हें लोहे का मजबूत जाल फेंक कर जमीन पर गिरा लिया था और अब दोनों लोहे की मजबूत जंजीरों में बंधे अंधेर नगरी के चौपट राजा के दरबार में राजा और मंत्री का इंतजार कर रहे थे।

चौपट राजा का इंसाफ

"अच्छा तो ये दो नमूने उड़ रहे थे हमारी नगरी के आकाश में? ऐसा करो इन दोनों को तोप के मुंह पर बाँध कर बारूद से उड़ा दो।" चौपट राजा ने दरबार में आते ही अपना फैसला सुना दिया।

"जो हुक्म महाराज......लेकिन इन्हें तोप से उड़ाने से पहले इस कपड़े के टुकड़े पर भी गौर किया जाये; ये मुझे किसी खजाने का नक्शा लगता है, ये नक्शा शक्तिमान की जेब से निकला है?" महामंत्री खटपट दास नक्शा चौपट राजा को दिखाते हुए बोला।

"क्यों बे किस काम का नक्शा है ये......." चौपट राजा ने गुर्रा कर पूछा।

"महाराज ये चिमटादास के खजाने का नक्शा, तुम इसे रख लो और हमें जाने दो।" रामानुजन तेजी से बोला।

"ये नक्शा तुम्हारे पास क्या कर रहा है, क्या तुम दोनों इस खजाने की खोज में उड़े जा रहे थे?" चौपट राजा ने गुर्रा कर पूछा।

"हाँ महाराज मैं तो फ़ालतू में इस शक्तिमान की बातों में आ गया नहीं तो अच्छा काम चल रहा था बच्चों को गणित की ट्यूशन पढ़ा कर......" रामानुजन गिड़गिड़ाते हुए बोला।

"बंद करो बकवास, अब तुम ये खजाना हमारे लिए ढूँढोगे बदले में हम तुम्हें तोप से बाँध कर बारूद से उड़ाने की बजाय फाँसी चढ़ाकर सजा देंगे।" चौपट राजा ने गुर्रा कर कर बोला।

"ये तो बहुत नाइन्साफ़ी है........" शक्तिमान गुस्से से बोला।

"चुप कर......महामंत्री खटपट दास इनके साथ हमारे प्यारे गर्दभ राज को बांध दो उसके वजन की वजह से ये उड़ न सकेंगे और जब इन्हें खजाना मिल जाएगा तो गर्दभ राज इन्हें घसीट कर हमारे दरबार में ले आ आएगा........." कहकर चौपट राजा ने अपनी बात खत्म की।

खजाने का तिलिस्म

गर्दभ राज करीब दो कुंतल का तगड़ा गधा था, जिसके शक्तिमान से बंधे होने के कारण शक्तिमान उड़ नहीं सकता था, इसलिए रामानुजन और शक्तिमान अपनी तकदीर को कोसते हुए खजाने की तलाश में निकल पड़े।

बौड़मदास का दर्रा एक भयानक जगह निकली, इसलिए नहीं की वहाँ खतरनाक दरिंदे थे बल्कि वहाँ खजाने की गुफा के मुँह तक पहुँचने में १००-१०० फ़ीट की सात ऊँचाइयाँ चढ़नी पड़ी वो भी २ कुंतल का गधा लेकर। इस काम को करने में शक्तिमान और रामानुजन को पूरे दो दिन लगे और उनकी सारी शक्ति खत्म हो गई। उन्होंने खजाने गुफा की के सामने पूरे एक दिन आराम किया और गर्दभ राज ढेंचू-ढेंचू करके उनका जी जलाता रहा।

खजाने के पहले दरवाजे पर जोड़ के १० सवाल लिखे हुए थे जिन्हे सरल करते ही खजाने का पहला दरवाजा खुद ही खुल गया और दरवाजा खुलते ही उनपर एक पत्थर का बना सांड टूट पड़ा उससे बड़ी मुश्किल से जान बचा कर वो दोनों तिलिस्म के दूसरे दरवाजे पर पहुँचे वहाँ दरवाजे पर घटा के २० सवाल लिखे थे जिन्हे सरल करते ही उनपर पत्थर का बना एक भालू टूट पड़ा जिससे बचकर वो तीसरे दरवाजे तक पहुँचे वहाँ भाग के तीस सवाल लिखे थे जिन्हे सरल करते हुए दरवाजा खुला और उनपर पत्थर के बने कुत्ते टूट पड़े जिन्होंने उनके कपड़े फाड़ डाले। उनसे बचकर वो चौथे दरवाजे पर पँहुचे वहाँ वर्गमूल के ४० सवाल लिखे थे जिन्हे सरल करते ही दरवाजा खुला और उन्हें पत्थर के बने एक अजगर ने जकड़ना चाहा। बड़ी मुश्किल से उन्होंने अपनी जान बचाई और पाँचवे दरवाजे पर जा पहुँचे। उन्होंने बाद में कुल १० दरवाजे पार किये जिनपर लिखे घनमूल, प्रतिशत, बीजगणित, ज्यामिति, त्रिकोणमिति, कैलकुलस, सांख्यिकी, स्थैतिकी, गति विज्ञानं, कोर्डिनेट ज्योमेट्री के सवालों को रामानुजन ने सरल कर दरवाजे खोले और शक्तिमान पत्थर के भेडियो, गीदड़ो, लोमड़ियों, शेर इत्यादि जानवरो से अपने पशुबल से मुकाबला करता रहा। जब वो खजाने के कमरे के सामने पहुँचे तो उनके सामने वहाँ एक बहुत ही गहरा १०० मीटर लंबा और २० फ़ीट गहरा नाला था जिसमे बर्फीला पानी भरा था। उस जमा देने वाले पानी का मुकाबला न तो न तो बुद्धिबल से हो सकता था और न पशुबल से।

"अब क्या करे?" रामानुजन ने पूछा।

"एक ही रास्ता बचा है.......कहते हुए शक्तिमान ने गर्दभ राज को उस पानी में धक्का दे दिया और रामानुजन को लेकर उसकी पीठ पर बैठ गया, गर्दभ राज को भी पानी ठंडा लगा लेकिन वो जानवर होने की वजह से ठंडे पानी में भी तैरता रहा ।

गर्दभ राज ने बहुत ढेंचू-ढेंचू की लेकिन शक्तिमान उसके कान पकड़ कर मजबूती से उसके ऊपर बैठा रहा और उसे एड़ी मारता रहा, रामानुजन शक्तिमान को कस कर पकडे उसके पीछे गर्दभ राज पर बैठा रहा। जब तक वो नाले के पार पहुँचे पानी में डूबे उनके पैर सुन्न हो चुके थे। वो बहुत देर तक अपने पैरो को रगड़ते रहे और गर्दभ राज गुस्से में ढेंचू-ढेंचू करता रहा।

"चुप कर आज तक तू हमपर सवारी कर रहा था आज हमने तुझ पर कर ली तो ढेंचू-ढेंचू कर रहा है।" शक्तिमान गुस्से से बोला और खजाने के कमरे में जा घुसा। कमरे में एक बड़ा सा संदूक रखा था।

जब शक्तिमान ने संदूक का दरवाजा खोला तो उन तीनों की आँखें फटी की फटी रह गई; संदूक में सुनहरे धातु के बने अनगिनत चिमटे भरे थे जिनका वजन ५०० किलो से कम न था।

"यार खजाना तो मिल गया लेकिन वापिस जाना बहुत मुश्किल है कौन भिड़ेगा उन पत्थरों के जानवरों से......" शक्तिमान चिंता से बोला।

"मेरे ख्याल से वापिस नहीं जाना पड़ेगा यही कहीं बाहर जाने का रास्ता होगा......जरा तलाश करो।" रामानुजन बोला।

पूरे कमरे में पत्थर की बनी सपाट दीवारें थी न कोई खिड़की न दरवाजा।

"जरा इस खजाने के बक्से को हटा, हो सकता है इसके नीचे ही कोई दरवाजा हो?" रामानुजन बोला।

शक्तिमान ने जैसे ही अपने पशुबल से वो खजाने का बक्सा सरकाया तो एक दीवार में सुरंग नुमा एक दरवाजा खुल गया।

"यही है बाहर जाने का दरवाजा.....चल खजाने के बक्से को धक्का दे इसमें बाद में हम भी कूद जायेंगे इसमें।" रामानुजन उत्साह से बोला।

शक्तिमान अपनी पूरी ताकत से खजाने के बक्से को धक्का देकर उस सुरंग में गिरा दिया, थोड़ी देर में बक्सा सुरंग में नीचे की तरफ तेजी से खिसका और गायब हो गया।

"अब हमारी बारी है......" रामानुजन बोला।

"सुरंग में पिछवाड़े छिल जायेंगे गुरु......." शक्तिमान बोला।

"नहीं छिलेंगे आओ......" कहते हुए रामानुजन ने गर्दभ राज को सुरंग में धकेल दिया और वो शक्तिमान के साथ गर्दभ राज से बंधी बेड़ियों पर बैठ गए और तेजी से सुरंग में नीचे की और खिसकने लगे। करीब १० मिनट की उतराई के बाद वो तीनों में रौशनी और हवा में थे। करीब १०० मीटर गिरने के बाद वो जमीन पर गिरे। पहले गर्दभ राज गिरा उसके ऊपर शक्तिमान गिरा और शक्तिमान के ऊपर रामानुजन गिरा। गर्दभ राज की ढेंचू-ढेंचू से सारा इलाका गूँज उठा। जब वो संभले तो उनके सामने खजाने का संदूक टूटा पड़ा था और सारे सुनहरे चिमटे जमीन पर बिखरे पड़े थे।

रामानुजन ने एक चिमटा उठाकर देखा और फिर तेजी से सारे चिमटे उठा-उठा कर देखने लगा।

तभी वहाँ अंधेर नगरी के महामंत्री खटपट दास की आवाज गूँजी, "अच्छा खजाना मिल गया तुमको, मैं तो गर्दभ राज की दर्द भरी ढेंचू-ढेंचू सुनकर आया था लेकिन तुम तो खजाना लेकर भागने के चक्कर में लगते हो, चलो अब तुम्हें फाँसी यही देनी पड़ेगी, पास में ही राजा चौपट शिकार कर रहे है वही चलकर तुम्हारी फाँसी के लिए फंदे तैयार कराता हूँ........सिपाहियों खजाना बक्से में भर लो और महाराज के प्यारे गर्दभ दास की मालिश करो और इन दोनों को फाँसी लटकाने के लिए महाराज के सामने ले चलो।"

 जान बची लाखों पाए 

जैसे ही सैनिक उन्हें दबोचने के लिए आगे बढ़े रामानुजन चिल्लाया, "चल शक्तिमान के बच्चे उड़ चल यहाँ से...... नहीं तो आज फाँसी लगनी तय है......"

"लेकिन ये गर्दभ राज से बंधी बेड़ियाँ......." शक्तिमान आश्चर्य से बोला।

"तू गर्दभ राज से भी बड़ा गधा है, अबे मुर्ख हम सुरंग में बेड़ियों के ऊपर बैठे थे, अब ये बेड़ियाँ घिस कर कमजोर हो चुकी है तोड़ डाल इन्हें और उड़ चल यहाँ से......" रामनुजन राजा के सैनिकों को आते देख और जोर से फुसफुसाया।

"अच्छा थोड़ा खजाना तो उठा ले, कुछ मेहनत वसूल हो जाए......." शक्तिमान बेड़ियों को तोड़ते हुए बोला।

"अबे उड़न-छू हो ले यहाँ से, ये सारे चिमटे सोने का मुलम्मा चढ़े हुए है, पीतल के बने हुए है......" रामानुजन शक्तिमान की पीठ पर चढ़ते हुए बोला।

"अच्छा फिर तो उड़न-छू होने में ही फायदा है।" शक्तिमान रामानुजन को अपनी पीठ पर बिठा कर उड़ते हुए बोला।

"अबे ये भाग रहे है.....अबे भाला मार कर नीचे गिरा लो इन्हें........"महामंत्री खटपट दास गुस्से से बोला लेकिन तब तक शक्तिमान और रामानुजन उड़कर उनके भालो की जद से बहुत दूर जा चुके थे।


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