चेहरे पर रंग
चेहरे पर रंग
चेहरे को रंग बिरंगा पोतकर वह सर्कस में लोगों को हंसा रहा था। हर छोटी बात को इस तरह बोलता कि लोग हंस हंस कर लोटपोट हो जाते। बार बार एक मोटा आदमी उसे डंडा दिखा रहा था। पर वह भी हर बार अपनी जेब से सीटी निकालकर बजाता हुआ भाग रहा था। इस प्रदर्शन में उसकी कितनी बेइज्जती हुई। इन सबसे बेपरवाह अपना काम कर रहा था। जैसे उसने मान और अपमान को जीत लिया है। गीता का स्थितप्रज्ञ दिखता।
शो के बाद वह अपना मुंह साफ करने लगा। रंग हटते ही चेहरे पर कुछ अश्रु बूंद दिखीं। उन्हें चुपचाप पोंछकर वह मैनेजर से आज की कमाई लेने चला गया। एक और अभिनय अभी उसे अपने घर पर खेलना है। रंग साफ करते ही वास्तविकता को छिपाने के लिये वह अदृश्य रंग लगायेगा। आखिर घर पर किसी को पता नहीं चलना चाहिये कि जो कमाई उसने की है, उसके लिये कितना अपमान झेला है।
