बुजुर्गों का हाथ जो सिर पे हो
बुजुर्गों का हाथ जो सिर पे हो
" अब के बच्चों में पहले वाली बात कहां अब बच्चे कहां बुजुर्गों की बात सुनते हैं? "
उन्होंने कहा तो जवाब भी वैसा ही आया.
" सच...बुजुर्गों का आशीर्वाद भरा हाथ सिर पर हो तो जिंदगी में दुःख पास नहीं फटकता!"
"अपनों के साथ ही मन का सुकून है अगर अपनों से दूर हो जाओ तो जिंदगी में कुछ भी अच्छा नहीं लगता है।"पुष्पा ने कहा तो सुनीता ने कहा...
" बिल्कुल ठीक कहती हो बहन!
मैं जब अपनों से अपनों से दूर होती हो तो मुझसे ना तो खाया जाता है ना पिया जाता है जिंदगी बिल्कुल बेकार लगती है!"
तभी सुनीता के सास ने कहा," शुरू में तुम कितनी अकेली अकेली रहती थी हमसे दूर दूर रहती थी बात भी नहीं करती थी अब वह तो बाद में जाकर तुम्हें अकल आई!"
शुरू शुरू में जब पुष्पा की शादी हुई थी तब वह सबसे अलग रहती थी अपने पढ़े-लिखे होने का उसको बहुत घमंड था वह किसी से बात भी नहीं करती।सिर्फ अपने कमरे में पड़ी रहती थी और पढ़ती रहती थी। किताबें पढ़ पढ़कर उसका दिमाग खराब हो रहा था।लेकिन...
बेचारी बात करेगी तो किस से करे...?उसका पति राजकिशोर सुबह का गया हुआ रात में आता था तो इसलिए बीच में वह पूरे दिन अलग था।
एक बार पुष्पा के पेट में भोजन के अपच का दर्द हुआ तो हारकर वह अपनी सास को बोलने गई उन्होंने दवा के साथ उसके पेट में हींग का लेप कर दिया और कुछ समय उसे पुदीना की पत्ती पीसकर दी।
तो... उसका पेट दर्द ठीक हो गया।
उसको आज भी याद है....
उस दिन सब उसके सामने बैठी रही थी।
साथ दादी सास और ननद सब मिलकर बार-बार उसका हाल पूछते रहे थे....
और वह समझ गई थी कि अपनों के साथ रहकर ही मन का सुकून है।
अपनों के साथ रहकर ही प्यार मिलता है और रिश्ते मजबूत होते हैं और दिल में भी बहुत खुशी मिलती है।
और ....
उस दिन जब राजकिशोर ऑफिस से आया तो की पत्नी को आने दिनों से ज्यादा खुश देख कर उसे बहुत अच्छा लगा और अब पुष्पा समझ चुकी थी कि अपनों के साथ ही प्यार विश्वास और खुशी है।
