प्रीति शर्मा

Horror


4.8  

प्रीति शर्मा

Horror


"ब्लडी मैरी"

"ब्लडी मैरी"

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सिलविया पढ़ने के लिए किताब लेकर बैठी थी कि... लाइट चली गई।

"ओहो... यह लाइट भी वक्त बेवक्त चली जाती है।"उसने ड्रायर में हाथ डाला और मोमबत्ती जलाई और किताब दुबारा हाथ में ली। कहानी का शीर्षक ही अपने आप में पूरी कहानी कह रहा था... "ब्लडी मैरी" लगता है कोई डराबनी कहानी है सिलविया सोचने लगी। उसकी उत्सुकता बढ़ गई मोमबत्ती की रोशनी में स्टडी टेबल पर बैठी सिलविया कहानी में डूब गई।

मैरी स्पेन के एक धनिक अधिकारी की खूबसूरत बेटी थी लेकिन जितनी खूबसूरत उतनी ही संवेदनशील दस-ग्यारह वर्ष की अवस्था में मैरी मां के सानिध्य से वंचित हो गई थी और अय्याश पिता साल होते-होते दूसरी पत्नी घर ले आया जिसे मैरी कभी पसंद नहीं आई।किशोरावस्था की ओर बढ़ती लड़कियां बेहद संवेदनशील होती हैं और भविष्य को लेकर बहुत सी कल्पनायें बुनती हैं।इसी उम्र में मैरी की दूसरी मां मरीना उससे उम्र में मुश्किल से दस वर्ष बड़ी थी, उसके पिता की सबसे करीबी हो गई और मैरी का पिता मरीना के प्यार में डूबता चला गया।वह भूल गया की मां की ममता से वंचित एक बेटी को उसकी जरूरत है।

जीवन में हुई इस दुर्घटना ने मैरी को अंतर्मुखी बना दिया।हमेशा तितलियों सी उड़ती फिरती हिरनी सी चंचल मैरी धीरे धीरे शांत ज्वालामुखी बन गई,जो अपने अंदर समय की तब्दीलियां दबाती चली गई।जैसे-जैसे मैरी बड़ी होती गई,उसकी सुंदरता निखरती गई और सारे देश में उसके चर्चे फैल गये।

उसकी मां मरीना उससे जलने लगी।वह चाहती थी कि उसकी शादी उसके सौतेले भाई से हो जाए लेकिन मैरी को वो एक आंख नहीं भाता था।आवारा शराबी जैक मैरी से कम से कम पन्द्रह साल बड़ा था और मैरी अभी अठारह साल की हुई थी।

इसी दौरान उसका पिता जेम्स जानलेवा बीमारी से ग्रस्त हो गया और बिस्तर पर पड़ गया और अब शायद उसके दिल में मैरी के लिए प्यार उमड़ा और उसने मैरी से अपने किये पर बहुत अफसोस जताया।साल की बीमारी के बाद जेम्स ईश्वर को प्यारा हुआ लेकिन जाने से पहले वह मैरी को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर मानो अपनी भूल का प्रायश्चित कर गया।

मरीना को बहुत बड़ा धक्का लगा और उसने मैरी को बहुत जलील किया।पर मैरी ने मरीना की परवाह नहीं की।बहुत बड़ी जायदाद की मालकिन बनते ही उसमें आत्मविश्वास जाग गया।उसके आसपास बड़े-बड़े लोग जो पिता के परिचित थे, आने लगे थे।सुंदरता के चर्चों ने उसको मशहूर कर दिया था और अब वो पिता की संपत्ति पर रानी बन बैठी थी।अपनी सुंदरता सुन सुनकर मैरी को स्वयं से ही मानो प्यार हो गया और वह अक्सर शीशे में अपनी शक्ल देखा करती और अब खुद ही अपनी सुंदरता को निहारती।   

तभी मैरी की मुलाकात एक पार्टी में चित्रकार विक्टर से हुई जो अभी स्कूल की पढ़ाई खत्म कर कॉलेज जाने लगा था।उसका भोलापन और सादगी मैरी के मन में घर कर गया।अब उसे जैसे जीवन के सभी सुख मिलने लगे थे और जिंदगी खुशगवार हो गयी थी।दो-तीन साल की दोस्ती के बाद मैरी ने उसे शादी का प्रपोजल दिया।इस समय मेरी की उम्र पच्चीस और विक्टर की उम्र बाइस साल थी।

पिछली जिंदगी के आठ-दस साल जो मैरी ने भुगता था,वह सब भूल गई और विक्टर के साथ उसकी जिंदगी बहुत अच्छी जा रही थी।शादी को आठ साल हो चुके थे लेकिन मैरी अभी मां नहीं बन पाई थी।मेरी को बच्चों से बहुत प्यार था और वह चाहती थी अब वह मां बन जायेऔर अपने बच्चों को बहुत प्यार देे जिससे वह बंचित रही।पर किसी वजह से उसकी इच्छा पूरी नहीं हो रही थी और अब वो चिन्तित रहने लगी थी।इस तनाव में उसकी सुंदरता धीरे-धीरे कम होने लगी थी और फिर विक्टर को वो शायद अखरने लगी थी।अब विक्टर उसपर कम ध्यान देता था और कम उम्र लड़कियों में ज्यादा समय गुजारा करता इसने मैरी को असुरक्षित महशूस कराया।

उसे लगने लगा अगर वह मां बन जाती है तो विक्टर फिर से उसके करीब आ जाएगा और इसके लिए वह डॉक्टर के पास गई लेकिन मैरी का दुर्भाग्य कि ना तो वह मां का प्यार पा सकी और ना ही मां बनने का सौभाग्य उसकी किस्मत में था।

समय अपने रास्ते भागा जा रहा था। अब मैरी को लगने लगा कि अगर वह मां नहीं बनी तो बिक्टर को खो देगी।वह अपनी मानसिक परेशानियों की वजह से ही अपने चेहरे की रौनक खोती जा रही थी।वह अब शीशें में देखती तो लगता कि वह उसे चिढा रहा है।चेहरे पर झांइयां नजर आने लगीं थीं।

मां बनने का जुनून उसे जगह-जगह भटका रहा था।ऊपर से विक्टर का उसे अनदेखा करना उसे तड़फा रहा था।उसने अब तांत्रिकों का सहारा लिया किसी भी तंत्र मंत्र विद्या से वह मां बनना चाहती थी और इसके लिए एक तांत्रिक ने उसे बच्चों की बलि देने के लिए तैयार किया।हर अमावस को उसे एक बच्चे की बलि देनी थी और जब ये बलि पूरी हो जायेंगी,उसे मां बनने का सौभाग्य मिलेगा। मैरी पागल हो गई,मां बनने की चाहत में।अच्छा बुरा सही गलत का उसे ध्यान ही नहीं रहा, बस उसे मां बनना था तो बनना था।

अब वह इस तलाश में रहती कि कोई बच्चा उसकी नजर में आ जाए और मौका मिलते ही वह किसी बच्चे को गायब कर अपने घर में नजर बंद कर लेती और अमावस पर तान्त्रिक क्रिया के बाद बलि दे दी जाती।इसके बाद उसके रक्त से मैरी अपना चेहरा धोती।उसे लगता कि इस क्रिया से उसके चेहरे पर चमक आयेगी और विक्टर पुनः उस पर आसक्त होगा।इस समय उसका रूप अत्यंत भयानक हो जाता आसपास फैला रक्त और बच्चे के मृत शरीर का सिर धड़ अलग पड़ा होता।मैरी जैसे किसी बीभत्स ड्रैकुला में परिवर्तित हो जाती।

विक्टर इस सबसे अंजान भोग-विलास में जुटा रहता। आसपास के इलाके में बच्चों के गायब होने की खबर फैल गई।पिछले तीन महीने में चार बच्चे गायब हो चुके थे सभी की उम्र पांच साल से छोटी थी।

  पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई चुकी थी।सभी छानबीन कर रहे थे लेकिन उसका कोई निष्कर्ष नहीं निकला।लेकिन एक दिन किसी व्यक्ति ने मैरी को किसी बच्चे के साथ देख लिया और लोगों को शक हो गया कि हो ना हो मैरी ही बच्चों को चुराती है लेकिन क्योंकि कोई प्रमाण नहीं था तो कोई सीधा उसके ऊपर उंगली नहीं उठा सकता था।मेरी जब भी बलि देती सारी रात गायब रहती।

एक दिन सफाई कर्मी को मैरी के बंगले के पीछे बहुत सी हड्डियां मिलीं, पुलिस आई पर मैरी सारे सबूत मिटा चुकी थी।इलाके में सभी उससे घृणा करने लगे और पीठ पीछे उसे ब्लडी मैरी पुकारते। सबको यकीन हो गया था कि मां बनने की चाहत में मैरी ही बच्चों के साथ कुछ गलत कर रही है।सब अपने बच्चों को उससे दूर रखते।

         मैरी बिल्कुल अकेली पड़ गई थी। एक तरह का सामाजिक बहिष्कार शहर के लोग कर चुके थे। वह विक्टर को साथ रहने को विवश करने लगी थी। विक्टर भी बेमन से उसके साथ रहता।इस तरह दो साल होने को थे बीस बलि पूरी हो चुकीं थीं।लेकिन इन दो साल में मैरी सुंदर संवेदनशील नारी से मानसिक रूप से एक संवेदनहीन ड्रैकुला के रूप में परिवर्तित हो गई थी।अब जब भी वो शीशे में देखती उसको अपने अंदर एक राक्षसी दिखाई देती। उसको अपना चेहरा ही बदसूरत भयानक दिखाई देता।उसे लगता कि वह खुद ही बच्चों का खून पी रही है।यह उसकी अंतरात्मा थी जो उसे बार-बार चेतावनी दे रही थी कि वह गलत कर रही है लेकिन अपने मां बनने के जुनून में वह अपनी अंतरात्मा को सुला देती।

अब जब वह शीशे में देखती तो स्वयं को ही

ब्लडी मैरी........  ब्लडी मैरी...... .ब्लडी मैरी....... पुकारती और जोर-जोर से हंसती, उस समय वास्तव में उसका रूप परिवर्तित हो जाता, उसे लगता उसके सिर से सींग निकल आये हैं, आंखें सुर्ख लाल हो जातीं, पुतलियां फिर जातीं और बड़े-बड़े दांत बाहर निकल आते।ये शायद दो साल से हो रही तान्त्रिक क्रिया का प्रभाव था या उसकी अंतरात्मा का रोदन जो उसे उसकी असलियत बता रही थी।पर मैरी अपने रास्ते में बहुत आगे बढ चुकी थी और इसी में आनन्द का अनुभव करती। अब उसे अपनी मंजिल करीब लगने लगी थी।वह जबतब शीशे में खुद को देख ब्लडी मैरी... ब्लडी मैरी.... पुकारती और भयावह अट्टहास करती। 

अमावस आने वाली थी और मैरी अभी तक बलि चढाने के लिये बच्चे का इन्तजाम नहीं कर पाई थी।वह गाड़ी लेकर शहर से बाहर निकल गई।शाम को जाकर एक शहर में उसे अपना लक्ष्य प्राप्त हुआ। 

यह एक तीन साल की छोटी बच्ची थी जो बहुत प्यारी थी।मैरी उसे बलि चढ़ाने के लिए तांत्रिक अनुष्ठान के लिए बैठी तो बच्ची खिलखिला रही थी।उसकी अंतरात्मा ने उसको दुत्कारा... कहीं कोई करुणा उसके अन्दर बाकी थी।

   मां का ममत्व कब किससे क्या करवा दे, कौन जानता है? शायद निश्चय डिग रहा था........ नहीं कह सकते।उसे ऐसा एहसास हुआ कि इसी बच्ची की उसे तलाश थी,यही उसकी बच्ची है जिसकी तलाश में उसने इतने साल बिताये हैं और बीस बलियां दीं।यही उसकी अपनी बच्ची है.... यही उसकी तलाश थी। आज वो जैसे मां बनने की प्रक्रिया से गुजर रही थी।बच्ची की मोहक मुस्कान उसके दिल में सूख चुकी ममता को जैसे कुरेदकर बाहर निकाल रही थी। 

  अभी उसके अंतर्मन में यह द्वन्द चल ही रहा था कि तभी विक्टर आ गया।उसे मैरी पर शक तो था ही।जब उसने देखा कि मैरी बलि देने जा रही है तो उसने उसे रोकने के लिए बलि का चाकू उठाया और मैरी की गर्दन पर खचाक..क्.. खच.. खचा.. खच और मैरी की गर्दन धड़ से अलग हो गई...... चारों तरफ खून के छींटें बिखर गये।बड़ा भयानक मंजर था।चारों तरफ खून के छींटे फैल गये विक्टर खून से नहा गया और बच्र्ची डरकर रोने लगी।     

 धड़ से अलग होने पर भी मैरी के चेहरे पर लगीं आंखें बच्ची की ओर देख रहीं थीं।ब्लडी. मैरी... उसके मुंह से अस्फुट स्वर निकले।

मरते समय मैरी की आत्मा उस तीन साल की बच्ची में थी जैसे ही मैरी के शरीर से आत्मा निकली और उस बच्ची में प्रविष्ट हो गई।बच्ची उठकर मैरी के कमरे में पहुंची और शीशे के सामने खड़ी हो गई।

ब्लडी मैरी... ब्लडी मैरी... ब्लडी मैरी..

उसने तीन बार शीशे पर लिखा और मोमबत्तियां जलाईं।मैरी का नाम लिया मानो श्रद्धांजलि दे रही हो। विक्टर को कुछ समझ ना आया अभी वो सदमे में था।

बच्ची अचानक बड़ी हो गई और उसका चेहरा भयानक हो गया,जो भी मुझे शीशे के आगे मोमबत्तियां जलाकर इस नाम से पुकारेगा,वह जीवन से मुक्त हो जायेगा।

तुम भी पुकारो विक्टर.... मुझे श्रद्धांजलि दो ना....

विक्टर जैसे सम्मोहन में बंध गया और शीशे के आगे खड़ा हो बुदबुदाया.. ब्लडी मैरी... ब्लडी मैरी... ब्लडी मैरी...

मैरी जोर से खिलखिलाई.... हाहा.. हा. ह. ह्.. हा..

...... विक्टर का हाथ पकड़ा और बालकनी से कूद गई।नीचे लाश के चीथड़े उड़ गये चारों तरफ भयानक मंजर था। 

शहर में सभी ने समझा कि मैरीको मारकर विक्टर ने आत्महत्या करली और साथ ही बच्ची भी गिर गयी। शहर में लोगों ने राहत की सांस ली। पर आज भी मैरी की ममतामयी आत्मा भटकती है और जो भी उसे याद करता है उसे मुक्त कर देती है। 

कहानी समाप्त हो चुकी थी।सिलविया पुस्तक को बन्द करने लगी लेकिन नीचे लिखे नोट को देख उसे पढने लगी। 

नोट-  कोई भी पाठक शीशे के सामने खड़े होकर ये हरकत ना दुहराये अन्यथा परिणाम भयानक हो सकता है।

"लेखक"

सिलविया को कहानी अच्छी लगी, पर लेखक का ये नोट उसे बेबकूफी भरा लगा।ऐसा भी कोई होता है भला... वह उठी शीशे के सामने उसने मोमबत्तियां जलाईं और बोलना शुरू किया.. ब्लडी मैरी.. ब्लडी मैरी.. ब्लडी मैरी...

 तभी शीशे में यकायक चेहरा बदलने लगा.. मैरी नजर आने लगी... और फिर... सुबह फ्लैट के ग्राउण्ड में सिलविया की चिथड़े- चिथड़े लाश पड़ी थी।

आप सभी चेतावनी को गंभीरता से लें, सिलविया वाली गलती ना दोहरायें।




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