AMIT SAGAR

Inspirational


4.4  

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भविष्य दिखाता आईना

भविष्य दिखाता आईना

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यूँ तो हम सभी रोज ही आईना देखते हैं, और हमें यह अच्छा भी लगता है, पर आज जब मैंने आईना देखा तो मैं अपने आप से नज़रे नहीं मिला पाया । क्योंकि मुझे उस आईने में आज अपनी जगह किसी ओर का चेहरा दिखाई दिया। पर बात यह अजीब नहीं थी कि मुझे किसी का चेहरा आईने में दिखाई दिया, बात यह अजीब है कि उसका ही चेहरा क्यों दिखाई दिया। क्योंकि उस नामुराद का चेहरा तो कोई सपने में भी देखना पसन्द ना करे, मुझे तो जीते जागते आईने में उस मनहूस का चेहरा दिख रहा था। कहीं मेरा आईना शापित तो नहीं हो गया है, या फिर यह आईनादेना चाहता है मुझे कोई नसीहत, या फिर बताना चाहता है कोई राज, या बात है कुछ और, तो क्या है सारा माजरा बढ़ते हैं आगे -  


मैं हूँ एक सीधा सज्जन आदमी मुझे क्या पता धुर्तता क्या होती है, लोग बुरे काम कैसे करते हैं ओर क्यों करते है। दूसरों की इज़्ज़त उतारना तो मुझे आता ही नहीं था। पर हवा बदलते देर नहीं लगती दोस्तों, पिछले कुछ दिनों से मेरे अन्दर अजीब से बदलाव आ रहे हैं, यह बदलाव मुझे चकित करते हैं और सोचने पर मजबूर करते हैं। कुछ दिन पहले की बात है मैंने देखा कि एक अन्धी बुजुर्ग औरत रास्ते पर भीख माँग रही थी, जिसकी जो हैसियत थी वो उस औरत के कटोरे में कुछ पैसे डाल रहा था, पर मुझे ना जाने क्या मस्ती सूझी, कि मैंने उसके कटोरे में लोहे के टुकड़े डाल दिये, पर बाद में मुझे इसका अफसोस हुआ। अगले दिन मैं बाजार से कुछ हरी सब्जियाँ लेने गया, दुकान पर जाकर मैंने दो - एक सब्जियों के मोल भाव किये, दुकानदार के‌ पीछे भी कुछ सब्जियाँ रखी थी, मैं उससे उन्ही सब्जियोँ के मोल भाव पूछ रहा था। जैसे ही वो पीछे मुड़ता मैं झट से अपने थेले मे कुछ भिण्डियाँ डाल लेता, क्योंकि उस सीजन में भिंडी ही बहुत महंगी थी। पर इस बात का मुझे बाद में अफसोस हुआ। बात यहाँ खत्म हो जाती तो ओर बात थी पर मुझे ना जाने क्या हो रहा था। रोज में कोई ना कोई गलत काम करता, और बाद में उसका पछतावा करता। मैं बुरा तो नहीं था, पर क्यों मुझसे हर रोज यह बुराई वाले काम हो रहें थे, और सबसे अचम्भित बात यह है कि मुझे सब पता रहता था कि मैं बुरा कर रहा हूँ,  पर फिर भी मैं अपने आप को बुरा करने से रोक ना पाता। कभी मैं किसी नर्बल पर हाथ छोड़ देता तो कभी किसी को अपशब्द बोल देता, और तो और मैंने अपनी माता और पिता का भी कई बार अपमान किया था, पर मैं ऐसा नहीं बनना चाहता था। क्योंकि मुझे फिल्मों में हीरो अच्छा लगता था विलेन नहीं, और मैं रियल लाइफ में हीरो बनना चाहता था विलेन नहीं, पर बुरे कर्म करके तो मैं कभी हीरो नहीं बन सकता था ।


मैं रात को सोते समय अपने व्यवहार का ही चिन्तन कर रहा था, कि मैं अच्छा बनना चाहता हूँ पर बुराई के रास्ते पर क्यों जा रहा हूँ, तभी मुझे बचपन की एक कहानी याद आ गई जो मेरी दादी मुझे सुनाती थी। वो कहती थी कि एक सफेद दाड़ी वाला आदमी जो कि चश्मा भी लगाता था और सिर पर सफेद पट्टी बाँधता था। उसमे दुनिया की सारी बुराईयाँ भरी पड़ी थी। वो बुराईयों का दलदल था। चोरी करना, शराब पीना, मजबूरो को सताना, हमेशा दूसरों का मजाक बनाना और लड़कियों का शोषण करना यह उसका शौक था सभी लोग उससे बहुत डरते थे और साथ ही उससे घ्रणा भी करते थे। यही कारण था कि उसको भगवान ने बहुत भयानक मौत दी थी। एक बार की बात है, बहुत तेज बारिश हो रही थी। तेज बारिश में भी वो बुरा आदमी अपनी मदमस्त चाल से लोगो को सताता हुआ चला जा रहा था। तभी एक सुनसान रास्ते पर जहाँ एक बड़ा सा गड्डा था, वो बुरा आदमी उसमे गिर गया, सारे मोहल्ले का गन्दा पानी ( मल-मुत्र, नाक-थूक ) उस गड्डे में ही आकर रुकता था। गड्डा काफी गहरा था, वो बुरा आदमी उस गन्दे पानी में तड़प तड़प कर मर गया, और लोगो के लिये एक खौफ भरी कहानी छोडकर चला गया कि जो बुरा करेगा उसका यही हश्र होगा। आश्चर्य की बात यह है कि मुझे उसी बुरे आदमी का चेहरा आज आईने में दिखाई दिया। दादी उसके कुरुप की अच्छे से बखान करती थी। 


तो अब बात करते है उस शापित आईने की, दरअसल वो आईना शापित नहीं था, शापित थे मेरे कर्म, जो कि वो आईना मुझे बता रहा था, कि अब मैं कहानी के उसी बुरे आदमी के मार्ग पर चल रहा हूँ, जिससे मैं बचपन से नफरत करता, था डरता था। आईना बता रहा था कि मेरा भविष्य भी उसी बुरे आदमी की तरह होगा। मुझसे भी सब लोग नफरत करेंगे। अपना भयानक भविष्य देखकर मैं इतना भयभीत हो गया कि उसी समय से मैंने सारे बुरे कर्मो से तौबा कर ली । 

आज मैं एक बहुत बड़ी कम्पनी मे मैनेजर हूँ, और हर साल मुझे बेस्ट ऑनस्टी मैन का अवॉर्ड मिलता है । अब मैं अपने आप को एक रियल हीरो समझता हूँ।

  


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