Bindiyarani Thakur

Tragedy


4.6  

Bindiyarani Thakur

Tragedy


भूख

भूख

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कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए पूरे देश में लाॅकडाउन कर दिया गया है। जिनके पास पैसे नहीं उनके लिए तो ये बहुत ही कठिन समय है।रमिया बैठी छत को घूर रही है। आज तीसरा दिन है जब घर में चूल्हा नहीं जला है।बच्चे रोटी मांग रहे हैं।घर में अन्न का एक भी दाना नहीं है।

दो दिन से घर में चूल्हा नहीं जला है आज तो रमिया के भी पेट में मरोड़ उठ रही है,पति को पुलिस उठा ले गई है और इस कोरोना के चक्कर में मेमसाहब ने भी आने से मना कर दिया है। सारी जमा पूँजी पहले ही पति को जेल से छुड़ाने में खर्च हो चुकी है। आदमी बीमारी से भले ही ना मरे भूख से पहले ही मर जाएगा।

पड़ोस की शीला से सुना था सरकार गरीबों को मुफ्त में खाना बाँट रही है।पता नहीं इस गाँव में कब खाना मिलेगा ?

तभी लाउडस्पीकर की आवाज आई आइये खाना ले जाइए और रमिया बच्चों को ले आवाज की दिशा में दौड़ पड़ी।


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