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Bindiyarani Thakur

Drama


4.8  

Bindiyarani Thakur

Drama


चिट्ठी

चिट्ठी

2 mins 102 2 mins 102

बबलू के पापा, 

मैं आपसे बहुत नाराज हूँ । आज सुबह जो भी हुआ उसने मेरे अस्तित्व पर ही सवाल उठा दिया! आखिर कौन हूँ मैं ?पिछले बीस वर्षों से स्वयं को आपकी अर्द्धांगिनी समझ कर ही तो जी रही थी और आज आपने एक झटके में ही मुझे मेरी औकात दिखा दी।इस उम्र में आप ही के साथ और सहारे ज़िन्दगी गुजारनी है। कितनी भी बीमार क्यों ना रहूँ अपने कर्त्तव्यों का सदा ही निर्वाह किया है आप से जुड़े हुए हर रिश्ते को मान दिया और निभाया भी है। मात्र अठारह वर्ष की थी जब आपके साथ जीवन की डोर बंधी थी तब से लेकर आज तक शायद ही कभी सुबह मैं देर से उठी या कोई काम कल पर छोड़ा हो, इस उम्र में भी घर के सारे काम अपने हाथों से ही करती हूँ क्योंकि आपको किसी दूसरे के हाथ का खाना पसंद नहीं, दूसरे के हाथ के धुले कपड़े भी आपको पसन्द नहीं है तो सब मैं अपने हाथों से ही करती हूँ । 

एक छोटी सी बात पर आपने मेरा दिल बहुत ज्यादा दुखाया है, आखिर इतना क्या बड़ा गुनाह कर दिया था मैंने! पत्नी हूँ आपकी बस आपके बटुए से सौ रूपये ही तो निकाले थे ,सब्जी वाले को देने के लिए ,गरीब आदमी है कबतक इंतजार करता,आप नहा रहे थे, मैं ने निकालकर दे दिए बस, कोई चोरी तो नहीं की, घर में सब्जी क्या मैं अकेली ही खाती हूँ? आपके आते ही बता भी दिया हालांकि इतना वर्षों में कभी भी मैं ने आपका बटुवा नहीं छुआ था। कभी आवश्यकता ही नहीं पड़ी थी और आज हठात् ऐसा माहौल बन गया आप अकेले में मुझे कुछ भी कहते तो इतना बुरा नहीं लगता लेकिन बच्चों के सामने आपने जो तमाशा किया उससे मुझे ज्यादा ठेस पहुंची है। मैं बहुत अपमानित महसूस कर रही हूँ ।बच्चे क्या सोच रहे होंगे कि इतने साल बाद भी हमारे बीच भरोसा नहीं है। बहुत बुरा लगा मुझे, और जबतक आप सबके सामने मुझसे माफी नहीं मांगते तब-तक मैं ना तो खाना खाऊँगी और ना ही दवाई, आगे आपकी मर्जी। 

सिर्फ आपकी

बबलू की माँ  

और चिट्ठी के मिलते ही फौरन बबलू के पापा हरकत में आए, झट से माफी मांगी और कान पकड़ कर बोले मेरी प्यारी प्राणप्रिये तुम कमाल करती हो अब जल्दी से खाना खालो मेरा बटुवा क्या सबकुछ तुम्हारा ही तो है और मैं भी तो तुम्हारा ही हूँ अब नाराजगी छोड़ मुस्कुरा भी दो, हमें भी भूख लगी है क्या बनाया है कुछ खिला भी दो। तुम्हारे खुश रहने से ही तो घर में रौनक और बरकत है।  

एक छोटी सी चिट्ठी ने झगड़ा सुलझा दिया।


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