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Gita Parihar

Tragedy Inspirational

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Gita Parihar

Tragedy Inspirational

भारत में फैले अंधविश्वास (डायन कुप्रथा)

भारत में फैले अंधविश्वास (डायन कुप्रथा)

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"बच्चों, वैसे तो हमने बहुत तरक्की कर ली है, फिर भी कई ऐसी घटनाएँ सामने आती हैं, जो सिद्ध करती हैं कि हम अभी भी अज्ञानता और अंधविश्वास की बेड़ियों में जकड़े हुए हैं। वर्ष 2000 में यूनिसेफ के साथ मिलकर फ्री लीगल एड कमेटी ने झारखंड के 4 जिले पूर्वी सिंहभूम, राँची, बोकारो और देवघर में जन जागरण और सर्वेक्षण का काम किया। 4 जिलों के 26 प्रखंड की 191 पंचायतों और 332 गांव में सघन अभियान चलाया तब डायन- बिसाही के 176 मामलों का पता चला। 4 जिलों में 176 महिलाओं पर प्रताड़ना का मामला अपने आप में बड़ा मामला था। इस आधार पर पूरे राज्य में यह आंकड़ा हजारों में होगा।"

"चाचू, क्या सच में डायन होती हैं ?" शशांक ने डर मिश्रित आवाज़ में पूछा।

"नहीं शशांक, यह निहायत अज्ञानता और अंधविश्वास है।"

"क्यों नहीं फिर इस अंधविश्वास को दूर करने के प्रयास किए जाते?" कमल ने पूछा।

"इस कुप्रथा से झारखंड को मुक्त करने में  जमशेदपुर झारखंड के प्रेमचंदजी अहम  भूमिका निभा रहे हैं। इन्होंने बिहार सरकार को डायन कुप्रथा प्रतिषेध अधिनियम 1995 का ड्राफ्ट सौंपा था। इसी के आधार पर सरकार ने 1999 में कानून बनाया था।

देश में यह पहली सरकार थी, जिसने डायन प्रथा के खिलाफ कानून बनाया।"

"क्या यह केवल झारखंड की ही समस्या है ?" यश का सवाल था।

"बिहार के अलावा झारखंड, छत्तीसगढ़, राजस्थान, महाराष्ट्र और उड़ीसा भी शामिल हैं।"

"इस कानून के बनने से क्या इन मामलों में कुछ कमी आई ?" इशान ने पूछा।

"ज़रूर, अब जहां कहीं भी डायन के नाम पर हत्या उत्पीड़न की शिकायत मिलती है, वहां ये पहुंच जाते हैं और पीड़ित की मदद करने के साथ प्रताड़ित करने वालों को सजा दिलाने और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए तत्पर रहते हैं।"

"क्या ही अच्छा हो कि स्कूल के पाठ्यक्रम के द्वारा भ्रांतियों को दूर करके लोगों को शिक्षित किया जाए !" करुणा ने सुझाव दिया।

"ठीक ऐसा ही श्री प्रेम चंद का मानना है। उन्होंने अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता को कक्षा 6 से लेकर पीजी तक के पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए विभाग को पत्र लिखा है, ताकि इसकी भयावहता को विद्यार्थी भी जान सकें।"

" डायन कुप्रथा का अस्तित्व अशिक्षा और अंधविश्वास के कारण है। जागरूकता ही इसके खिलाफ बड़ा हथियार है।"करूणेश ने कहा।

" झारखंड में डायन- बिसाही के नाम पर महिला- पुरुषों को प्रताड़ित करने और पीट-पीट कर मार डालने की घटनाएं आम हैं। अमानवीय प्रताड़ना का सिलसिला आज भी जारी है। हिंसा की सबसे ज्यादा शिकार महिलाएं ही होती हैं। आम लोगों के सहयोग से ही इस पर पूरी तरह अंकुश लग सकता है।"

"नियम बन जाने से लोगों के मन में भय पैदा होगा और इस प्रकार की घटनाएँ रुकेंगी।" नकुल ने कहा।


"नकुल, बहुत से लोग नियमों का उल्लंघन धृष्टता से करते हैं, तनिक भी हिचकिचाते नहीं। राज्य में डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम 2001 बना, बावजूद इसके डायन- बिसाही के नाम पर प्रताड़ना और हत्या के मामलों में कमी नहीं आ रही है, लेकिन इस कानून ने पीड़ितों को सहारा ज़रूर दिया है।"

"यह सामान्य नहीं, सामाजिक मनोवैज्ञानिक समस्या है। इसे खत्म करने के लिए मिशन आधारित कार्यक्रम चलाना होगा। सरकार को राष्ट्रीय कानून बनाना चाहिए। ग्रास रूट से लेकर ऊपर के स्तर तक काम करने और इसके रोकथाम के लिए सभी में इच्छा शक्ति का संचार होना चाहिए। ओझा- गुनी की प्रतिभा का सकारात्मक उपयोग किए जाने की जरूरत है ताकि वे कुप्रथाओं को बढ़ावा देने के बजाय इनके उन्मूलन में सहायक बनें।"अंदर आते हुए सुरेन्द्र भाई ने कहा।

" ग्रामीण इलाकों में पारंपरिक रूप से जड़ी- बूटियों के जानकार लोगों की काबिलियत को सही दिशा में मोड़ कर उनका लाभ उठाने, गाँवों में हर्बल पार्क विकसित करने जैसी रणनीति भी मददगार साबित हो सकती है।" उनके मित्र गौरव बक्षी ने कहा। 

 

 "आप सभी के सुझाव अति उत्तम हैं। प्रेमचंद बताते हैं कि वर्ष 1991 की एक घटना ने उन्हें और उनके साथियों को अंदर तक हिला दिया। जब जमशेदपुर के मनिकुई गाँव में एक महिला को डायन होने के आरोप में पीटा जाने लगा, बचाव करने पर उसके पति व एक बेटे को भी पीट -पीट कर मार डाला गया। इस घटना के बाद उन्होंने तय कर लिया की डायन कुप्रथा के खिलाफ जो भी हो सके, करना है।"


"हम सब को मिल कर इस बुराई को समाज से उखाड़ कर फेंकना है, मुझे उम्मीद है कि आधुनिक समाज एक दिन अवश्य चेतेगा क्योंकि ऐसी क्रूरता किसी सभ्य समाज में कतई स्वीकार्य नहीं हो सकती है।"


"चाचाजी, सबसे पहले तो टीवी सीरियल और फिल्मों में भूत- पिशाच और डायन आदि के प्रदर्शन पर रोक लगना भी जरूरी है। ये समाज को आगे ले जाने की बजाय पीछे धकेल रहे हैं।"

"बिल्कुल सही,तो बच्चों,आज से जहां कहीं,किसी को अंधविश्वास को हवा देते देखो,वहां अपने पढ़े हुए सबक उन्हें सीखाने का भरसक प्रयास करना,ठीक है?"

"बिल्कुल ठीक, चाचाजी।"

"कल फिर मिलेंगे, एक नए विषय पर चर्चा होगी, तब तक,जय हिंद।"

"जय हिन्द।"



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