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Vijaykant Verma

Tragedy


3  

Vijaykant Verma

Tragedy


बेबस जूही

बेबस जूही

3 mins 251 3 mins 251

सेक्स का भूत जब किसी इंसान पर सवार होता है, तब इसे सिर्फ लड़की का जिस्म दिखता है, और सारे रिश्ते पीछे छूट जाते हैं!

बेबस लाचार जूही को जब उसके भाई ने ही अपनी हवस का शिकार बनाया तो, उसकी समझ में न आया कि वो क्या करें! क्या कोई बहन अपने भाई के खिलाफ थाने पर रिपोर्ट दर्ज करा सकती है? और क्या थाने पर रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद सरकार की तरफ से उसे कोई सुरक्षा मिल सकती है? क्योंकि इस तरह की लड़कियों के लिए अब तक जहां भी कहीं आश्रम या अनाथालय की व्यवस्था हुई है, वहां की स्थिति भी दयनीय ही है!

एक बार उसकी एक सहेली के साथ भी कुछ ऐसा ही हादसा हुआ था। और तब उसने अपने भाई के खिलाफ रिपोर्ट लिखाई थी। लेकिन इस घटना के कुछ दिनों के बाद उसके साथ क्या हुआ, और वो कहाँ चली गई, उसका कुछ पता, क्योंकि उस दिन से जब भी उसने उसको फोन लगाया, उसका मोबाइल बंद मिला !

किसी लड़की के जिस्म से उसके रिश्तेदारों द्वारा खिलवाड़ करना कोई नई बात नहीं है। चाचा, मामा, ताऊ, भाई, बाप और दूर के रिश्तेदार अक्सर ही घर की बेटियों के साथ गलत काम करते हैं, और उसे धमकी देते हैं, कि अगर किसी को कुछ बताया, तो तेरा ही अहित होगा! तेरी ही नाक कटेगी! तुझ पर ही लोग थूकेंगे! तेरी ही बदनामी होगी और तेरी पूरी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी! क्योंकि तब न कोई तुझ से शादी करेगा और न कोई तुझको शरण देगा!

फिर भी एक बार हिम्मत करके उसने भाई के खिलाफ थाने में रिपोर्ट लिखाने का सोचा, और घर से निकल पड़ी। लेकिन राह चलते उसको बहुत सारे प्रश्न परेशान करने लगे। उसने सोचा, कि भाई के खिलाफ रिपोर्ट लिखाने के बाद घर में तो उसको रहने नहीं दिया जाएगा, तो रिपोर्ट लिखाने के बाद फिर वो जाएगी कहां? कौन उसको शरण देगा, कौन उसको भोजन पानी देगा, कैसे वो रोज स्कूल जा पाएगी, कैसे अपनी पढ़ाई को सामान्य रूप से जारी रख सकेगी! हर जगह उसके भाई के साथ संबंध के ही चर्चे होंगे! अड़ोस पड़ोस, दोस्त, और जान पहचान के लोग भी मदद तो उसकी करेंगे नहीं, पर मजा जरूर लेंगे, और गंदे गंदे प्रश्न पूछ कर उसके साथ छेड़खानी भी करेंगे! और तब हर एक के हाथों सिर्फ एक खिलौना बन कर रह जाएगी वो! और अगर कोई हाथ उसकी मदद के लिए आता भी है, तो इस बात की क्या गारंटी है, कि वह हाथ खुद उसके जिस्म के साथ छेड़खानी नहीं करेंगे?

और तब आधे रास्ते जाकर भी वह वापस लौट आई। घर पहुंचने पर उसने देखा कि भाई दरवाजे पर ही खड़ा था। उसने जूही से मुस्कुराकर कहा, "मैं जान गया था कि तू मेरे खिलाफ थाने में रिपोर्ट लिखाने गई है। और मुझे यह भी मालूम है, कि तो आधे रास्ते से ही वापस आ गई है! तू मेरी बहुत अच्छी और बहुत प्यारी बहन है। बस दो चार साल की और बात है यार। फिर तेरी शादी हो जाएगी और तेरा भी एक हंसता खेलता परिवार होगा। इसलिए ज्यादा न सोचा कर और जैसे चल रहा है चलने दे!

जूही ने पहले ही अपने हथियार डाल दिए थे। और अब उसने अपनी किस्मत की डोर पूरी तरह से भाई के हाथों में सौंप दी। लेकिन इस समय उसकी आंखों में जो आंसू थे, मजबूरी के और बेबसी के, उन्हें पोछने वाला कोई न था!


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