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Savita Singh

Romance Tragedy


4.9  

Savita Singh

Romance Tragedy


अनकही कहानी

अनकही कहानी

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नयना सातवीं क्लास में एक सहशिक्षा के इंटर कॉलेज में पढ़ती थी। हल्का सा दबा हुआ गेंहुँआ रंग लेकिन अत्यंत सुन्दर नाक नक्श सीधी सादी प्यारी सी लड़की पढ़ने में सामान्य ! फिर आई उसकी क्लास में कविता नाम की एक प्यारी लड़की वो पढ़ाई में भी ज्यादा अच्छी लेकिन उन दोनों की बहुत अच्छी दोस्ती हो गई। नयना के भैया भी ग्यारहवीं में पढ़ते थे और कविता के भैया भी उसी उम्र के थे। उनकी भी आपस में दोस्ती हो गई। कविता और नयना की दोस्ती पूरे कॉलेज में मशहूर थी ! सातवीं आठवीं बड़े अच्छे से लड़के लड़कियाँ आपस में लड़ते-झगड़ते निकल गया। दोनों के भैया भी इण्टर पास करके कविता के लखनऊ पढ़ने और नयना के भैया बनारस में इंजीनियरिंग में आगे पढ़ने चले गए !

नवीं में कविता ने साइंस चुना और नयना ने आर्ट्स लिया, दोनों एक ही सेक्शन में थीं हिंदी,अंग्रेज़ी की क्लास साथ होती बाकी विषय अलग क्लासों में जाना होता लेकिन उनकी दोस्ती में फर्क़ नहीं आया बल्कि ये दोस्ती दोनों की मम्मियों की भी हो गई थी !

कुछ समय बाद कविता को लगा ये कुछ छुपा रही है और ध्यान दिया तो दसवीं क्लास का एक लड़का काफ़ी सुन्दर सा था नयना को देखा करता था और ये भी सबकी नज़रें बचाकर उसे देखती ! कविता ने पूछा लेकिन पहले वो आनाकानी की फिर बताया वो शम्भू है न वो मुझसे हिंदी या अंग्रेजी के नोट्स और बुक्स ले जाता है कभी घर से ले लेता है मेरी किताबों में जगह जगह तस्वीरों पर अपना और मेरे नाम का शार्ट फॉर्म लिख देता है। पहले मैंने नहीं ध्यान दिया पर अब मुझे भी वो अच्छा लगता है, कविता ने कहा मुझे तो अभी तक एहसास नहीं प्यार कैसे होता है, उस समय दोनों की उम्र तेरह साल थी, शम्भू अठारह का था ! फिर कविता उसे छेड़ने के अलावा कुछ नहीं करती।

कुछ दिनों बाद वो नमस्ते बोलने लगा, ये बातें 70 -71 की हैं, जब ये प्यार और इज़हार होते-होते दूसरे से शादियाँ हो जाया करती थी ! दिन बीते इसी तरह मन में मासूम सा अथाह प्यार रखे हुए वो दोनों दसवीं में और वो ग्यारहवीं में चला गया और इनकी सुई वहीं अटकी थी, नयना ने कविता से बोला एक बार की तुम्हीं कहो न जो कहना है कह दे किताबें क्यों ख़राब करता है ? कविता तो तेज़ उसे कुछ भीडर नहीं लगता उसने रास्ते में रोका, पूछा, शम्भू जी आप ये किताबों में नाम लिख कर क्या पाएंगे। आप कुछ कहना चाहते हैं तो सीधा उसको बोलिये। शायद कुछ अच्छा ही जवाब मिले लेकिन वो तो उल्टा डर गया। सब बंद !

बहुत रोई नयना आखिर किसी के लिए पहली बार उसका दिल धड़का था ! उसके भैया आये बहन को रोते उदास देखा तो पूछा सब जाना और वो लोग पंजाबी थे तो जातिगत कट्टरता नहीं थी। भैया ने बुलाया उसे पूछा क्या शादी करोगे मेरी बहन से ? उसने सच या झूठ, डर से बोला मेरी शादी तो तय है !

इस बात का धक्का नयना को ऐसा लगा की उसने कभी शादी न करने की सोच ली ! दसवीं के बाद कविता के पापा का तबादला हो गया लेकिन पत्रों का आना जाना जारी रहा और उसकी तक़लीफ़ उसे महसूस होती वो अक्सर खुद को कोसती की मेरे ही वज़ह से वो अलग हो गए। कविता की शादी भी बहुत कम उम्र में हो गई। वह बी.ए, पार्मेंट वन में थी। तभी उसके पहले दो बार वो गई नयना के पास और दो तीन बार नयना आई लेकिन उसके दिल की कसक उसकी नम आँखों से छलक ही जाती। आख़िर वो पहला प्यार था जिसके लिए उसकी धड़कनें तेज़ हूई थी !

वो बनारस पढ़ने चली गई। कविता की शादी हो गई। उसके बाद खतो किताबत भी बंद हो गई। फ़िर सुना कि उसके साथ पढ़ने वाले एक पंडा के लड़के से शादी हो गई। उसके बाद दोनों का कोई हाल नहीं जान पाई कविता ! लेकिन लगता है कि पहले प्यार की पहली क़सक निकली नहीं होगी और कविता भी अफ़सोस में है की शायद मैंने न बोला होता तो उनका पहला प्यार परवान चढ़ जाता !


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