अधिकार
अधिकार
राधिका अपनी विदाई पर अपने मम्मी पापा से लिपटकर बहुत रोई। उसके आँसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।
राधिका डोली में बैठते हुए बार बार मुड़कर अपने घर को ऐसे निहार रही थी, जैसे उसके अंदर कुछ टूट रहा हो, कुछ ख़ाली हो रहा हो।
फिर, जब राधिका पग फेरे के लिए शादी के बाद पहली बार मायके आई, तो उसके कदम कुछ ठिठक से गए, क्योंकि पास ही खड़े भाई भाभी उसको घूर रहे थे।
मम्मी ने आकर राधिका को गले लगाकर कहा,
"बेटी, इस घर पर आज भी तेरा उतना ही अधिकार है, जितना पहले था।"
