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नम्रता चंद्रवंशी

Tragedy


4  

नम्रता चंद्रवंशी

Tragedy


आशा -भाग 3

आशा -भाग 3

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(विमला मौसी आशा को सुरभि मेम साहब के घर जाने से मना करने लगी...)

अब उसके आगे......

आशा मन ही मन सोच रही थी कि -"मां सुरभि मेम साहब के घर जाने से मना क्यों कर रही है,मां ने ऐसा क्यूं कहा को वे अच्छे लोग नहीं है, वे तो कितने अच्छे और भले लोग हैं,वे तो कभी - कभी हमारी मदद भी करते हैं, यहां तक कि जब भी आते हैं हमारे लिए भी कुछ न कुछ लेकर ही आते हैं...आदि "। तरह - तरह के सवाल उसके मानस पटल पर आ रहे थे,जिसका उसके पास फिलहाल कोई उत्तर नहीं था।

दरअसल,सुरभि मेम साहब के पति अशोक उपाध्याय पास के ही प्रतापपुर ब्लॉक में लेखाकार थे,दो सालों तक यही पोस्टिंग थी उनकी, और पूरे परिवार के साथ यही अपने गांव में ही रहते थे।

लेकिन दो साल पहले उनका ट्रांसफर यहां से से लगभग 400किलो मीटर दूर रामपुर जिले के नौडीहा प्रखंड में हो गया था।कुछ दिनों तक वे अकेले ही रामपुर शहर मे रहते थे,हर रोज रामपुर से नौडीहा अपने मोटर साइकिल से आना - जाना करते थे। लेकिन उनका लड़का

विश्वजीत उपाध्याय (जिसे घर में सब लोग विकी बुलाते थे) जब सातवीं क्लास में था तब अशोक चाचा ने पूरे परिवार को वही रामपुर बुला लिया था।तब से वे सब पूरे परिवार के साथ वही रहते थे।सिर्फ त्योहार और अन्य किसी छुट्टियों में ही घर आते थे।

वैसे भी पहले से ही विमला मौसी का उनके घर काम करना उनके भाइयों और मुहल्ले वालों को बिल्कुल भी नहीं भाता था।वो तो अशोक चाचा के सामने किसी की जुबान नहीं खुलती थी।

ये सारी बातें विमला मौसी बखूबी जान रही थी,लेकिन वो नहीं चाहती थी कि आशा विमला मौसी के जैसे ही चौका - बर्तन करके जिंदगी बसर करे,वो चाहती थी कि आशा पढ़ाई करे और नौकरी पाकर एक अच्छी जिंदगी गुजारे।

लेकिन साथ ही साथ वो सुरभि मेम साहब को भी नाराज़ नहीं करना चाहती थी,ऐसे में वो खुद ही जाने का सोची, और जी जान लगाकर पैरो पर खड़े होने का प्रयास करने लगी।लेकिन वो खड़ी हुई थी कि धड़ाम से ज़मीन पर गिर पड़ी।

आशा के कानों में आवाज गूंज गई,वो आकर विमला मौसी को खूब डांटने लगी - " मां तुम्हें क्या चाहिए,तुम मुझे बता देती,बहदुर बन रही हो बहुत,थोड़ा बहुत जान बचा है उसे भी

गवांना चाहती हो क्या"।

आशा विमला मौसी को उठा कर चारपाई पर लेटा रही थी,उसे भी महसूस हुआ जैसे विमला मौसी का दाहिना भाग सुन्न पड़ गया था।उसके बला( एक प्रकार की चूड़ियां) से विमला मौसी के दाहिने पांव में जोर से खरोच लग गई ,उसे खून भी निकला पर विमला मौसी को महसूस तक नहीं हुआ।आशा मन ही मन समझ गई थी।इधर विमला मौसी आशा के भावनाओं से अनजान थी।

विमला मौसी ने सोच रखा था कि आशा को बिना बताए ही वो रमन चाचू के पत्ते पर एक चिट्ठी स्कूल के शुक्ला गुरूजी से लिखवाएगी,

और रमन चाचू के आते ही वो आशा को सब कुछ बता देगी।तब - तक विमला मौसी ने घर खर्च के लिए मंजू चाची से कुछ रुपए उधार ले लिया था।और विमला मौसी अपनी मदद के लिए भी झट से मंजू चाची को ही आवाज लगा देती थी।आशा सबकुछ जान चुकी थी लेकिन फिर भी वो विमला मौसी के सामने अनजान बनी हुई थी।

बहरहाल,आशा को अब कुछ करना था, इसलिए सबसे पहले वो मंजू चाची को आवाज लगाते हुए की - " चाची मां का खयाल रखना ।" आशा सुरभि मेम साहब के घर की ओर चली गई।मेम साहब का घर आशा के घर से लगभग दो किलो मीटर दूर था,जिसे पैदल ही तय करना होता था। आधे रास्ते में कहीं - कहीं कटीली झाड़ियां, तो कहीं कीचड़ भरा रहता था।हालांकि जहां से मेम साहब का मुहल्ला शुरू होता था वो रास्ते बिल्कुल साफ और अच्छे थे।

किसी तरह आशा सुरभि मेम साहब के घर पहुंची और सभी का चरण स्पर्श किया।अशोक चाचा गांव में झगड़े के समाधान के लिए बुलाए गए पंचायती में गए हुए थे।सुरभि मेम साहब ने विमला मौसी के न आने का वजह पूछा तो आशा ने सारी बातें विस्तार से बता दिया, और फिर मेम साहब के बताए अनुसार काम में लग गई।

आज उसने सूट और सलवार पहन रखा था जो उसे स्कूल में मिला था।एक हाथ में झाड़ू और दूसरे हाथ से अपना ओढ़नी संभालते हुए वो विकी के रूम में पहुंची तो विकी ने चेहरे पर हल्की सी मुस्कान और अपने आंखों और भवों को मिचते हुए पूछा - "तुमने स्कूल यूनिफॉर्म क्यूं पहना है,तुम यहां पढ़ने आयी हो क्या"।इस पर आशा ने कुछ जवाब नहीं दिया बस अपने ओढ़नी को जोर से बंधा और काम पे लग गई,उसे तो यह भी पता नहीं था कि स्कूल यूनिफॉर्म सिर्फ स्कूल में पहनते हैं।विकी ने पूछा तो आशा को लगा जैसे इसका मज़ाक बना रहा है।आशा तो अपने नये स्कूल ड्रेस को संभाल कर रखा थी और वो उसे रिश्तेदारों के घर शादी- ब्याह में पहनती थी।

आशा अपने काम में लगी हुई थी वो झाड़ू पोछा कर के बर्तन धोने के लिए खिड़की( घर के पिछे का भाग) तरफ जाने लगी,मेम साहब बर्तनों को वही रख देती थी, किचेन में जाने की अनुमति विमला मौसी और आशा को नहीं थी।

आशा वही खिड़की तरफ सीमेंट से बने पक्का पर बर्तन धोने लगी और विकी भी अपने रूम से निकाल कर हॉल में बैठ कर टीवी देखने लगा।

अब आगे.......



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