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Richa Baijal

Romance

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Richa Baijal

Romance

ज़रा करीब तो आओ ना !

ज़रा करीब तो आओ ना !

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दिल दे रहा हूँ , ज़रा करीब तो आओ ना !

तुम बिन लगता नहीं ये दिल 

इतना तो समझ जाओ ना !

आज़मा रहा है मुझ को पल -पल 

ख्वाबों में है तुम्हारा-ही आना जाना 

अब इस कदर आज़माओ ना !

दिल दे रहा हूँ , ज़रा करीब तो आओ ना !


तुम्हारे होने से ही होता हूँ 

आजकल मैं कम सोता हूँ 

धड़कनों में महफूज़ हो तुम 

अब इस कदर ठुकराओ ना !

दिल दे रहा हूँ, ज़रा करीब तो आओ ना !


देखा था तुम्हें जब पहली बार 

धक् -धक् कर बैठा था यार 

थम सा गया था वक्त ,

आँखों में अनजाना इकरार 

मेरी बाहों में थम जाओ ना !

दिल दे रहा हूँ, ज़रा करीब तो आओ ना !


तुम्हें तकने की आदत हो गयी है 

इस दिल को तुम्हारी ही चाहत हो गयी है 

जो न भी चाहूँ, तो रुक जाता हूँ 

मैं समर्पण भाव से झुक जाता हूँ 

एक बार तुम भी तो मुझे गले से लगाओ ना !

दिल दे रहा हूँ, ज़रा करीब तो आओ ना !


अब समझ भी जाओ ना !

दिल दे रहा हूँ , ज़रा करीब तो आओ ना !

यूँ वफ़ा को मेरी अब और आज़माओ ना !

दिल दे रहा हूँ , ज़रा करीब तो आओ ना !



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