Richa Baijal
Abstract
पाँच उँगलियों से बनती है मुट्ठी
पांच मुट्ठियों से जज़्बा कुछ खास है
है मुकाम को पा लेने की चाहत
कि हम सब साथ है
मिलकर कुछ ठानी है
आओ मिलकर कुछ कर जाएँ
इस दुनिया में जीत कर
अपना नाम कर जाएँ।
एक वक्त अपना ...
सीधी बात लोगो...
मेरी 'जान ' त...
सिगरेट
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शतरंज
हाल- ऐ - दिल
मल्लेश्वरी-स्...
खोल अब घूघंट के पट उसने बोलना सीख लिया है। खोल अब घूघंट के पट उसने बोलना सीख लिया है।
बूढ़ाते पेड़ के जड़ कोठर में फिर फूट पड़े कोई बीज। बूढ़ाते पेड़ के जड़ कोठर में फिर फूट पड़े कोई बीज।
हे जन ! नदी निर्मल बहती कल कल सदा रखे ख्याल तो हम सदा निहाल। हे जन ! नदी निर्मल बहती कल कल सदा रखे ख्याल तो हम सदा निहाल।
बोझ अपने आप का मत डाल कहारों पे क्यों भार बना है धरती पे औरों के इशारे पे। बोझ अपने आप का मत डाल कहारों पे क्यों भार बना है धरती पे औरों के इशारे पे।
अब हो अमान्य वरना ऐ मानव तू कहलायेगा नादान। अब हो अमान्य वरना ऐ मानव तू कहलायेगा नादान।
मैं तो इक कठपुतली की तरह हूँ जो ख़ुद की मर्जी से जी भी नहींं सकती। मैं तो इक कठपुतली की तरह हूँ जो ख़ुद की मर्जी से जी भी नहींं सकती।
अगला पन्ना किताब का उसकी। जहाँ चाहें घुमा दें, ये है मर्ज़ी उसकी। अगला पन्ना किताब का उसकी। जहाँ चाहें घुमा दें, ये है मर्ज़ी उसकी।
तुम ही कहो तो मैं क्या करूँ ? ख़ुशी मनाऊँ या आँसू बहाऊँ ? तुम ही कहो तो मैं क्या करूँ ? ख़ुशी मनाऊँ या आँसू बहाऊँ ?
दुनिया रूपी रंगमंच पे नाचे जा रहे हैं नाचे जा रहे हैं। दुनिया रूपी रंगमंच पे नाचे जा रहे हैं नाचे जा रहे हैं।
लेकिन प्रश्न फिर भी वही किस हेतु तन धारण किया ? लेकिन प्रश्न फिर भी वही किस हेतु तन धारण किया ?
पल पल बंधी डोर से सब काठ की पुतली हैं। पल पल बंधी डोर से सब काठ की पुतली हैं।
जीवन के संग्राम में हम करें आभार उसी परमात्मा का। जीवन के संग्राम में हम करें आभार उसी परमात्मा का।
खुद को थोड़ा और निखार लूँ मैं बस अब यही तैयारी हैं। खुद को थोड़ा और निखार लूँ मैं बस अब यही तैयारी हैं।
काठ की तो मैँ नहीं भावनाएं है कुछ सपने कुछ आकांक्षाए है। काठ की तो मैँ नहीं भावनाएं है कुछ सपने कुछ आकांक्षाए है।
वरना पिंजरे में बंद कौए के आगे फैंक आऊंगा यह कागोश ! वरना पिंजरे में बंद कौए के आगे फैंक आऊंगा यह कागोश !
मेले में आते जाते सब सुख दुःख का अनोखा मेल। मेले में आते जाते सब सुख दुःख का अनोखा मेल।
जो साथ कभी हो गए तो जल जायेगा ये ज़माना सारा। जो साथ कभी हो गए तो जल जायेगा ये ज़माना सारा।
जीवन व्यापन के लिए उन्हें पूजने याद करने कर्तव्य है हमारा। जीवन व्यापन के लिए उन्हें पूजने याद करने कर्तव्य है हमारा।
दुश्मनों को छोड़ो खुद का दिल ही हमें कठपुतली बनाता है। दुश्मनों को छोड़ो खुद का दिल ही हमें कठपुतली बनाता है।