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manish shukla

Abstract

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manish shukla

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ज़िंदगी खेल नहीं

ज़िंदगी खेल नहीं

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दांव कभी लगाना नहीं,

ज़िंदगी खेल नहीं,


इसे आजमाना नहीं,

ये तो वक्त का दरिया है,


इसमें बहते जाना है

ज़िंदगी खुशबू है,


इसकी महक फैलाना है,

ज़िंदगी तो साथी है,

कभी हाथ छुड़ाना नहीं है।


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