STORYMIRROR

Surendra kumar singh

Abstract

4  

Surendra kumar singh

Abstract

यूँ तो हम भी हैं

यूँ तो हम भी हैं

1 min
210

यूँ तो हम भी हैं पक्षधर

जीवन के

इस महामारी में जीवन बचाने

की दुनिया भर में चल रही सरकारों की तरह

क्योंकि जीवन है तो सम्भावनाएं हैं

इसलिए हम भी निर्भर हैं जीवन पर


ये बात और है कि

जिस दौर से गुजर रहे हैं हम

जीवन मायने नहीं रखता

महामारी की बात और है

फिर भी सरकारें अपने वजूद के लिये

जाने कितने जीवन

कुर्बान कर रही हैं


जब कि जीवन बचा कर भी

और सार्थक हो सकती हैं

सरकारें।

मनुष्यता विधि का आधार सम्भव है

जीवन बचाने के लिये भी

सरकार की मर्यादा बचाने के लिये भी

और देश की सीमाओं को बचाने के लिए भी

बस मनुष्यता में विश्वास भर की बात है


और आज भी हमारी भारतीयता

इसी विश्वास के साथ

मानव सभ्यता

और सरकारों के लिये

आकर्षण का केंद्र बन रही है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract