STORYMIRROR

AMAN SINHA

Romance

4  

AMAN SINHA

Romance

युं जो दिल खोलकर मिल रही हो तुम

युं जो दिल खोलकर मिल रही हो तुम

1 min
474

यूँ जो दिल खोलकर मिल रही हो तुम

लगता है के अब मैं तुमको बिल्कुल याद नही 

ऐसा होता है निकाह के बाद अक्सर 

ऐसा होने मे कोइ गलत बात नही 


अब मेरे खयालों से अज़ाद हो तुम 

किसी और के साथ आबाद हो तुम 

पर तुम पर ही खत्म होता है इश्क़ मेरा 

मेरे पहले मोहब्बत की याद हो तुम 


मैं अचरज़ मे हूँ तुम ने ये क्या कर दिया 

अपने बच्चे का नाम मुझपर रख दिया 

क्या कहकर शौहर कैसे मनाया होगा 

ना जाने कौन सा किस्सा सुनाया होगा 


अब ये सोचता हूँ मैं रोज़ क्युं हिचकता हूँ 

पानी भी जो पीता हूँ तो क्युं सरकता हूँ 

क्या खुब लिया है बदला मेरी जुदाई का 

मुझे हिस्सा बनालिया है अपनी तनहाई का 


चलो फिर मैं भी अपना घर बसाता हूँ 

अपने किस्मत को मैं भी आजमाता हूँ 

कभी खिले कोइ कली या फूल हो पैदा 

उसे फिर मैं भी तेरे नाम से बुलाता हूँ।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance