यथोदा का नंदलाला
यथोदा का नंदलाला
मोर पंख माथे पे चंदा और होंठों पर मुस्कान है,
कौन है वो जो पूरे वृंदावन को प्रीत की धुन पे नचाता है,
वो है माखनचोर यशोदा का नंदलाला,
उसकी प्यारी सी मुस्कान पर पूरा वृंदावन मतवाला,
जिसकी बांसुरी की धुन पर नाचते,
स्वयं शिवशंभु भोलेनाथ है,
वो है सबका सखा सबका नंदकिशोर,
कंस का काल देवकी का लाल,
बलराम का अनुज गोपियों का कान्हा,
नाम अनेकों उसके वो कभी वस्त्र चुराता,
तो कभी मटकी फोड़ राधा को सताता,
मनमोहिनी हंसी तिरछी नजरें,
कमर पर बंसी गले में माला पहने,
मीठी मीठी बांसुरी की धुन पर सबको नचाता,
वो तो बिष्णु का ही अवतार है,
मैया को सताता सबका माखन है चुराता,
वो कहलाता माखनचोर भी,
मोर पंख माथे पे चंदा और होंठों पर मुस्कान है,
कौन है वो जो पूरे वृंदावन को प्रीत की धुन पे नचाता है,
वो है राधा का कृष्ण गोपियों का सखा,
नंदलाल का कान्हा वासुदेव का पुत्र,
बाल लीलाओं से मन मोह ले सबका,
मनमोहन है वो कृष्ण,
मुरलीधर बंशीधर राधेश्याम,
माखन मुरारी वो कान्हा,
केशव कुंज बिहारी,
वो है मीरा की भक्ति.,
राधा की शक्ति,
रूक्मिणी की प्रीत,
भक्तों की भक्ति में रम जाता वो कृष्ण,
सबका है प्रिय वो यथोदा का नंदलाला।
