अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा
Inspirational
यह मत पूछ क्या लिखता हूं,
कुछ हिसाब बेहिसाब लिखता हूं,
हां कुछ बेईमान तो हूं शब्दों का,
तो ईमान भी रखता हूं कुछ गमों का।
कितने लोग जमा हैं तुमको पता है मंच से,
भीड़ कारवां बनेगी न समझ पाओगे तंज से।
इत्तफाक जिंदग...
कान्हा
सर्द हवाएं
कभी ख़ुश तो कभ...
मेरा ग़म
उसके घर की खुशियां हमें बन जाना है। इस बार हमें ऐसी दीपावली मनाना है। उसके घर की खुशियां हमें बन जाना है। इस बार हमें ऐसी दीपावली मनाना है।
कर्मों का कारवां, चल रहा बदस्तूर नियति बनती जा रही, हर पल के कर्मों की तस्वीर, कर्मों का कारवां, चल रहा बदस्तूर नियति बनती जा रही, हर पल के कर्मों की तस्वीर...
स्त्री को जिसने जैसा चाहा वैसा परिभाषित किया। स्त्री को जिसने जैसा चाहा वैसा परिभाषित किया।
पांव टीके तुम्हारे धरती पर देते मानवता का ज्ञान पांव टीके तुम्हारे धरती पर देते मानवता का ज्ञान
संस्कार तो आभूषण है इसके बिना ना जीवन की शोभा। संस्कार तो आभूषण है इसके बिना ना जीवन की शोभा।
मुहब्बत भी मुस्काती हैं, मेरे आगोश में ख़ुश हो जाती हैं ! मुहब्बत भी मुस्काती हैं, मेरे आगोश में ख़ुश हो जाती हैं !
रणछोर नहीं रणवीर हूँ मैँ अपनो की तकदीर हूँ मैँ। रणछोर नहीं रणवीर हूँ मैँ अपनो की तकदीर हूँ मैँ।
लोग बदल जाते हैं सारे , तस्वीर बदलने लगती है। लोग बदल जाते हैं सारे , तस्वीर बदलने लगती है।
खुशियों की सौगात लेके आए वो, खेल सारे पटाखे ओर दिये लाए वो। खुशियों की सौगात लेके आए वो, खेल सारे पटाखे ओर दिये लाए वो।
होश नहीं किसी को हैं यहाँ पर ,किसी को किसी की परवाह नहीं ! होश नहीं किसी को हैं यहाँ पर ,किसी को किसी की परवाह नहीं !
कन्दर्प दूत बना भेजा पार्वती का विवाह प्रस्ताव त्रिनेत्र ने भस्म किया। कन्दर्प दूत बना भेजा पार्वती का विवाह प्रस्ताव त्रिनेत्र ने भस्म किया।
हमारी मंशा सही के विरुद्ध की यही तो वजह युद्ध की है ... हमारी मंशा सही के विरुद्ध की यही तो वजह युद्ध की है ...
अपने हमसफर की दुनिया में अर्धांगिनी नहीं, उसकी पूरी कायनात हूं। अपने हमसफर की दुनिया में अर्धांगिनी नहीं, उसकी पूरी कायनात हूं।
हमें देख दुश्मन भी हम से घबराएंगे। हम भारत का भविष्य हैं हमें देख दुश्मन भी हम से घबराएंगे। हम भारत का भविष्य हैं
धूल को धूल समझना भूल है धूल अतीत और भविष्य का मूल है। धूल को धूल समझना भूल है धूल अतीत और भविष्य का मूल है।
कारवाँ के लोग अपनी मंजिलों पर, पहुँचकर फिर अकेले चलते चलेंगे। कारवाँ के लोग अपनी मंजिलों पर, पहुँचकर फिर अकेले चलते चलेंगे।
अर्धांगिनी ,वामांगी,जीवन संगिनी ,नामो से अभिभूत हूं। अर्धांगिनी ,वामांगी,जीवन संगिनी ,नामो से अभिभूत हूं।
मजबूत प्रधानमंत्री के कारण हुआ, भवम। मजबूत प्रधानमंत्री के कारण हुआ, भवम।
तीन रंगों का तिरंगा हमारा। उसपे न्योछावर देश सारा... तीन रंगों का तिरंगा हमारा। उसपे न्योछावर देश सारा...
दांत खट्टे किए थे सभी दुश्मनों के, सूरत,पूना, प्रतापगढ़ के मैदानों में। दांत खट्टे किए थे सभी दुश्मनों के, सूरत,पूना, प्रतापगढ़ के मैदानों में।