STORYMIRROR

Ritu asooja

Inspirational

4  

Ritu asooja

Inspirational

*जल ही जीवन *

*जल ही जीवन *

1 min
227

निरन्तर नव नूतन

निर्मल शीतल

रुक गया जो थम गया

दूषित हो जाऊंगा

दुर्गन्ध से भर जाऊंगा

मेरा अस्तित्व मेरी पहचान

निरंतर गतिमान।


अग्रसर मेरी मंजिल

आगे बढ़ना

राहों में हो रोड़े तमाम

मैं बना लेता अपना स्थान

मैं दरिया का बहता जल।


संग बहा ले किनारे कर देता सारे मल

मैं हूं जल लोगों को देता जीवन प्राण

निर्मलता , स्वच्छता मेरी एक -एक बूंद

तृप्त करती प्यासे की प्यास।


मेरा दुरुपयोग मुझे दूषित ना

करने का लो संकल्प

मैं जल मनुष्य तन में भी विद्यमान

समझोगे जो जल की अहमियत

तभी रख सकोगे अपना भविष्य सुरक्षित।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational