STORYMIRROR

Rekha Bora

Romance

4  

Rekha Bora

Romance

यह किसकी आवाज़

यह किसकी आवाज़

1 min
222

यह किसकी आवाज़

सुन रही हूँ मैं

अपने स्वप्नों की

विचित्र छाया तले।


क्या यह मेरी आवाज़ है

पर नहीं शायद

तुम्हारी आवाज़ है यह

लेकिन मैं पहचान नहीं पा रही।


सुनाई नहीं दी है न

तुम्हारी आवाज़

एक लम्बे अरसे से

क्यों मिल नहीं पायी तुमसे

रंगहीन इन्द्रधनुष सी।


मध्यान्ह, सन्ध्या और रात्रि के बाद

मैं जान नहीं पा रही

शायद तुम

मेरे नीले आकाश का अभाव हो

जहाँ अटक जाती है मेरी।


सारी हँसी और रुलायी

जैसे नाव बिना माँझी के

किसी निर्जन द्वीप में।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance