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Tripti Dhawan

Abstract

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Tripti Dhawan

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ये दिल , दिल ही तो है

ये दिल , दिल ही तो है

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हंसता है, रोता है,

पर दिल, दिल ही तो है


हर बात पर तेरा होता है,

ये दिल, दिल ही तो है


तुझसे नाराज़ हर मर्तबा होता है

पर तुझपे ही सिर्फ फिदा होता है


तू मना ले तो मान जाए

क्योंकि सिर्फ तुझसे ही खफा होता है


है तो धड़कता तो मेरे सीने में ये

पर तेरी ही धड़कनो पे चला करता है


तुझसे मिला है और तेरा ही है

ये दिल, दिल ही तो है ।।



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