STORYMIRROR

Tripti Dhawan

Abstract

2  

Tripti Dhawan

Abstract

ये दिल , दिल ही तो है

ये दिल , दिल ही तो है

1 min
134

हंसता है, रोता है,

पर दिल, दिल ही तो है


हर बात पर तेरा होता है,

ये दिल, दिल ही तो है


तुझसे नाराज़ हर मर्तबा होता है

पर तुझपे ही सिर्फ फिदा होता है


तू मना ले तो मान जाए

क्योंकि सिर्फ तुझसे ही खफा होता है


है तो धड़कता तो मेरे सीने में ये

पर तेरी ही धड़कनो पे चला करता है


तुझसे मिला है और तेरा ही है

ये दिल, दिल ही तो है ।।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract