Tripti Dhawan
Inspirational
दिल को जो छू जाए वो अहसास है हँसी
एक छोटे से बच्चे की पहचान है हँसी
जब बिन सोचे होठ मुस्कुराये
बस वही वाली बात है हँसी।
दिल जब चुप होने को न चाहे,
दिमाग सोच कर चुप न हो जाये,
जब दिल का बच्चा खिल खिला जाए,
वो वाली सच्ची बात है हँसी।
माँ
आत्मदर्शन
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जीवन में सिगर...
हँसी
प्रोम्प 28 आश...
साथ साथ
शतरंज
महत्वाकांक्षा अवसाद की बुनियाद है। महत्वाकांक्षा अवसाद की बुनियाद है।
आओ अक्षत रोली चंदन लेकर, तिलक लगायें उनके भाल पर। आओ अक्षत रोली चंदन लेकर, तिलक लगायें उनके भाल पर।
बिछा दो सपनों की चादर, गुलाबी रंगों से सजा दो मन। बिछा दो सपनों की चादर, गुलाबी रंगों से सजा दो मन।
नहीं डर उनका बुझने का, जो दीपक है उनके घर का। नहीं डर उनका बुझने का, जो दीपक है उनके घर का।
मैं हिंदी भारत का गौरव, मैं हिन्द का मान हूँ. राष्ट्रप्रेम की सकल विश्व मे। मैं हिंदी भारत का गौरव, मैं हिन्द का मान हूँ. राष्ट्रप्रेम की सकल विश्व मे...
डरो मत ,झिझको मत ,जो है दिल में वो कहो। डरो मत ,झिझको मत ,जो है दिल में वो कहो।
लिख इतिहास अपना , तू मनुज मनोहर है। लिख इतिहास अपना , तू मनुज मनोहर है।
है मेरा सब कुछ समर्पित तुझको ही ऐ मातृभूमि। है मेरा सब कुछ समर्पित तुझको ही ऐ मातृभूमि।
तुम खून मुझे दो, मैं आजादी दिलवा दूंगा। आततायी अंग्रेजों को, मैं लड़ कर हरवा दूंगा। तुम खून मुझे दो, मैं आजादी दिलवा दूंगा। आततायी अंग्रेजों को, मैं लड़ कर हरवा ...
दो कुल को संवारती है नारी स्व शक्ति से कुल सम्हालती। दो कुल को संवारती है नारी स्व शक्ति से कुल सम्हालती।
परिवार के वास्ते ही जीना हमें, परिवार के लिए मरना हमें। परिवार के वास्ते ही जीना हमें, परिवार के लिए मरना हमें।
इतनी प्यारी धरती को अब कहाँ छोड़कर जाएँ। देशभक्ति की भावना अपने मन में जगाएँ। इतनी प्यारी धरती को अब कहाँ छोड़कर जाएँ। देशभक्ति की भावना अपने मन में जगाएँ।
आज महफूज़ है जिन हाथों में यह देश हमारा: अविश्मरणीय है उनका शौर्य व उनका सहारा। आज महफूज़ है जिन हाथों में यह देश हमारा: अविश्मरणीय है उनका शौर्य व उनका सहारा...
मैं समाज से, समिष्ट से जुड़ना चाहती हूं, मैं व्यष्टि का विराट रूप देखना चाहती हूं। मैं समाज से, समिष्ट से जुड़ना चाहती हूं, मैं व्यष्टि का विराट रूप देखना चाहती...
हमारे जांबाजों ने उसकी हरकतों का आपरेशन विजय चला कर मुंह तोड़ जवाब दिया। हमारे जांबाजों ने उसकी हरकतों का आपरेशन विजय चला कर मुंह तोड़ जवाब दिया।
नहीं बाँधा जा सकता है दोस्ती को किसी निश्चित दिन में, किसी निश्चित दायरे में। नहीं बाँधा जा सकता है दोस्ती को किसी निश्चित दिन में, किसी निश्चित दायरे म...
नारी के अपमान पर, क्यों सब थे चुपचाप। चौसर की बाजी नहीं, फिर भी करते पाप।। नारी के अपमान पर, क्यों सब थे चुपचाप। चौसर की बाजी नहीं, फिर भी करते पाप।।
समाज की दृढ़ सुव्यवस्था का आधार उज्ज्वलचरित्र के इंसान पर होता निर्भर! समाज की दृढ़ सुव्यवस्था का आधार उज्ज्वलचरित्र के इंसान पर होता निर्भर!
पुराने हीर रांझा अब मात्र कहानियों में ही बंद है बस रह गया दिखावटी ,छलावा सा प्रेम। पुराने हीर रांझा अब मात्र कहानियों में ही बंद है बस रह गया दिखावटी ,छलावा सा ...
परवरिश, परिस्थिति और संगति के कारण ही लोग अच्छे या बुरे होते हैं, परवरिश, परिस्थिति और संगति के कारण ही लोग अच्छे या बुरे होते हैं,