मैं संभल संभल के गिर रही हूँ ,
यार तेरी बाहों में .....
कभी चुप रह के कभी हँस के ,
खो रही तेरे ख्यालों में |
तू ना जाने कहाँ से आया ,
फिर धीरे धीरे मुझे बहकाया ,
मैं तड़प तड़प के जी रही हूँ ,
यार तेरे इशारों में |
मुझे छूने की जो साजिश थी ,
उस साजिश ने बड़ा उलझाया ,
मैं मचल मचल के सिमट गई ,
यार तेरे नजारों में |
सारी रात ये नैना जले ,
बिन कुछ कहे भी सब कुछ सुने ,
मैं पागल होकर अब जी रही हूँ ,
यार तेरे ख्वाबों में |
ये नई दोस्ती का नया पैगाम ,
कब तक साथ देगा मेरी जान ?
मैं इसी उलझन में झुलस रही हूँ ,
यार अपने सवालों में |
मैं संभल संभल के गिर रही हूँ ,
यार तेरी बाहों में .....
कभी चुप रह के कभी हँस के ,
खो रही तेरे ख्यालों में ||