यादों की गलियों से
यादों की गलियों से
कुछ लम्हे झांकते हुए
मुस्कुराते हैं ,
एक पगडंडी जो तुम तक
गुजरती थी,
जहां मेरी सांसे भी थम
जाया करती थी,
कितने खुशनुमा हुआ करते थे,
डूबकर तेरे ख्यालो में,
कोई खूबसूरत सा
एहसास
मुझे छूकर गुजर जाता था,
वो मखमली सी
छुअन,
मेरी रूह तक उतर जाते थे,
और दे जाते थे,
चाँद की मद्धम सी
चांदनी,
और मैं संवर जाती थी,
वो तारो की
खिलखिलाहट,
वो भीगी सी हवाओ की
सिहरन
और उस पर तुम्हारा यू बेपरवाह
चुपके से चले आना,
जैसे सौ जन्मों को एक
लम्हे में जी लिया हो!

