यादों के लिहाफ
यादों के लिहाफ
ओढ़कर तेरी यादों का लिहाफ,
हमने सोने की कोशिश की
न जाने कैसी तड़प, हर लम्हा महसूस की
करवटें बदल बदल, गुजरती रही रात
हर करवट में मैंने,कमी तेरी महसूस की
भीगने लगा जब तकिया, मेरा आँसुओं से
सिरहाने तेरी बाँहों की, कमी महसूस की
चाँद संग चाँदनी को, झूमते देखा जब
मेरे दिल ने उस पल तेरी पनाहों की,
कमी महसूस की
नहीं गुजरी जब रात, मेरी तन्हाई में
लम्हा लम्हा ज़िंदगी में अपनी,
तेरी कमी महसूस की।

