STORYMIRROR

Suresh Koundal 'Shreyas'

Abstract Drama Tragedy

4  

Suresh Koundal 'Shreyas'

Abstract Drama Tragedy

यादों का भँवर

यादों का भँवर

1 min
226

ख्वाबों ख्यालों के अनदेखे भंवर में

ज़िंदगी की तलाश में अजनबी इस शहर में

मुकम्मल मिलन की आस लिए

भटका मैं यूँ इस अनजाने से सफर में ।


गलतफहमी में था ,

कि वो रहबर मेरा, मेरा हाथ थाम लेगा

बिन बताए ही वो ...मुझे ढूंढ लेगा

इसी आस में चलता रहा बेफिक्र मैं 

बिछुड़ गया मैं इस अनदेखी डगर में


सोचा कि आँखों से बहते हुए अश्क 

देख हाल वो मेरा इस कदर पूछ लेगा

जितना दर्द में रोई हैं आँखें ये मेरी 

मुस्कान वो उतनी वो इनमें भर देगा

प्यार की बारिशें यूँ वो उड़ेल देगा

मेरे दिल के इस सूखे हुए समंदर में 

बीती ज़िंदगानी पर वो ना आया

हुआ लापता मैं इस कातिलों के शहर में 


हसरतें दिल की दिल में दबाकर

अब जीए जा रहा हूँ बस इसी ही फ़िकर में

आएगा वो इक दिन ,कभी तो कयामत होगी

बैठा हूँ मैं बस , अब इसी ही सबर में ।


देखना कितनी ताक़त है मुहब्बत के असर में

मिलें ठोकरें चाहे बीते ज़िंदगानी कुफ्र में 

तब तलक ना मुझको उसका दीदार होगा

तब तलक ना रूह को मेरी सुकून होगा

हर पल मुझको बस तेरा इंतज़ार होगा

चाहे बीत जाएं ना सदियां यूँ लेटे क़बर में ।।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract