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Madhu Vashishta

Action Inspirational

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Madhu Vashishta

Action Inspirational

यादगार लम्हे।

यादगार लम्हे।

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जब मैं बेटी थी और मेरी भी मां थी   

सच मानो तब मुझे परेशानी है कहां थी

हर उस बात को वो समझ जाती थी,

जो कि मैं कह भी नहीं पाती थी

हर बात को वो सुन लेती थी

अपनी प्रतिक्रिया भी दे देती थी

बस मेरे सुनाने और उनके समझाने के बीच

हर समस्या को ही दूर कर देती थी

वह मेरी मां थी

हर दिन हर लम्हा उन्हें मेरा इंतजार था,

मैं कितना बकबक करती थी लेकिन 

फिर भी उन्हें सारी बातें याद थी मेरी

लगता था वह लम्हे अब मैं कभी नहीं पाऊंगी

मां तो रही नहीं अब मैं किस तरह से जी प

 वह सारे लम्हे तो मन में समा गए

और अब भले ही मैं मां की बेटी नहीं रही

 लेकिन मुझे बेटी की मां तो बना गयी

उम्र के इस मोड़ पर अब मैं अपनी बेटी में ही

 अपनी मां का रूप देखती हूं

उसकी बातों में अपने लिए परवाह देखती हूँ

मन को बहुत खुशी मिलती है 

जब मैं अपनी बेटी की बेटी में भी 

अपनी मां की ही छवि ही देखती हूं। 



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