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chandraprabha kumar

Romance

4  

chandraprabha kumar

Romance

याद तुम्हारी

याद तुम्हारी

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अपने को हमने भी

ढाल लिया,

गल गये वे

सारे शिकवे,

याद है 

केवल जीना। 

जिये जा रहे हैं

दिन बिता रहे हैं ,

तुम्हारे लिये

तुम्हारे प्यार के लिये,

तुम्हारी मधुर स्मृति लिये

तुम्हारे साथ बिना। 

याद में तुम्हारी

बेकल हैं 

हम यहॉं,

क्या तुम भी

याद करते होंगे

हमें वहॉं। 

कभी जो साथ दिन बिताये थे

साथ सपने देखे थे,

अब मुझे जगाकर

तुम दूर हुए

किससे करें शिकायत

किससे करें शिकवा। 


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