STORYMIRROR

Ketankumar Kantilal Bagatharia "Rahi"

Fantasy Others

3  

Ketankumar Kantilal Bagatharia "Rahi"

Fantasy Others

वसंत

वसंत

1 min
196

वसंत ने जब ली अंगड़ाई!

प्रकृति ने ग़ज़ल पाई,

ठहर गई सांसें पतझड़ की,

ऋतुराज ने बांहें फैलाई,

खिला आंगन हरियाली का,

सांसों ने करवट बदली,

त्योहार की लड़ियां भर गई,

हर आंगन में खुशी भर दी,

वसंत ने जब ली अंगड़ाई!



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Fantasy