Ketankumar Kantilal Bagatharia "Rahi"
Abstract Horror
जग झूठा यार नहीं,
तेरी चाहत में कुछ खास नहीं,
छोड़ चले सब एक एक,
जब उनका स्वार्थ छूटा,
में वही वौसा ही खड़ा।
जग झूठा यार न...
"मतलब क्या!"
वसंत
शुक्रिया
पहचान है हिन्...
मोत से बड़ी क...
कोरोना काल मे...
ढुन्ढेगी कहा ...
वक़्त
कुछ पन्ने जिं...
बरसे बन नित सावन बरसात तुम्हारे जाने के बाद। बरसे बन नित सावन बरसात तुम्हारे जाने के बाद।
मैं मेरे शब्द और भाव मिल, जब भी देखते हैं बेटी को तो देखते और देखते ही रहते हैं! मैं मेरे शब्द और भाव मिल, जब भी देखते हैं बेटी को तो देखते और देखते ही रह...
फिर जीवन शुरू हो जाता है सृष्टि का क्रम निरंतर यूँ ही चलता रहता है। फिर जीवन शुरू हो जाता है सृष्टि का क्रम निरंतर यूँ ही चलता रहता है।
करेंगे जनमानस की अनदेखी स्वर्णिम इतिहास कैसे रचेंगे ? करेंगे जनमानस की अनदेखी स्वर्णिम इतिहास कैसे रचेंगे ?
प्रभु तेरे कलयुग की लीला अद्भूत अगण निराली है! प्रभु तेरे कलयुग की लीला अद्भूत अगण निराली है!
सहमा उपवन छाया कुहास अलि मौन शांत बीता सुहास! सहमा उपवन छाया कुहास अलि मौन शांत बीता सुहास!
प्रेम करो निज कर्म से, किन्तु है कैसा यह प्रेम ? प्रेम करो निज कर्म से, किन्तु है कैसा यह प्रेम ?
प्यार की शक्ति से बनेगा, स्वर्ग ये सारा संसार। प्यार की शक्ति से बनेगा, स्वर्ग ये सारा संसार।
शिक्षक जिंदगी की महत्वपूर्ण कड़ी है, जिनके बिना जीवन का पहिया चलना असंभव है। शिक्षक जिंदगी की महत्वपूर्ण कड़ी है, जिनके बिना जीवन का पहिया चलना असंभव है।
तुम चांद नहीं पर चांद से भी खूबसूरत हों तुम! तुम चांद नहीं पर चांद से भी खूबसूरत हों तुम!
जीवन नैया को तुम, भवसागर में आगे बढ़ाओ लक्ष्य पर रखकर कड़ी नजर, पार उतर जाओ। जीवन नैया को तुम, भवसागर में आगे बढ़ाओ लक्ष्य पर रखकर कड़ी नजर, पार उतर जाओ।
बूंदें सावन की रही पुकार घटा घनघोर रिमझिम फुहार। बूंदें सावन की रही पुकार घटा घनघोर रिमझिम फुहार।
आज जब मेरी नादानियों को साज़िशें समझने लगे तो लगता है मैं बड़ी हो गयी। आज जब मेरी नादानियों को साज़िशें समझने लगे तो लगता है मैं बड़ी हो गयी।
साठ सावन बीते,क्या दौरे ज़िंदगी थी! वह बचपन कि सखियां,वह छुपम छुपाई। साठ सावन बीते,क्या दौरे ज़िंदगी थी! वह बचपन कि सखियां,वह छुपम छुपाई।
सच ! पतन वह हाथों अपने स्वयं सृजित करता है। सच ! पतन वह हाथों अपने स्वयं सृजित करता है।
सच्ची मोहब्बत को जो प्रोफेशन बनाते हैं अंत में वो सब कुछ गंवाते हैं। सच्ची मोहब्बत को जो प्रोफेशन बनाते हैं अंत में वो सब कुछ गंवाते हैं।
कड़वाहट चाय में चीनी सी घुल गई पोता सेतु बना फिर एक बार सुलह हो गई। कड़वाहट चाय में चीनी सी घुल गई पोता सेतु बना फिर एक बार सुलह हो गई...
अरमानो कि कोई सीमा हो तो बता सब कुछ कितनी पास दिखाई देता है मेरी छत से! अरमानो कि कोई सीमा हो तो बता सब कुछ कितनी पास दिखाई देता है मेरी छत से!
सुना है इमन्यूटी बढ़ती है हंसने से कोरोना क्या बिगाड़ लेगा मेरा सुना है इमन्यूटी बढ़ती है हंसने से कोरोना क्या बिगाड़ लेगा मेरा
तुम क्या जानो कल क्या होगा कल क्या होगा कल क्या होगा। तुम क्या जानो कल क्या होगा कल क्या होगा कल क्या होगा।