Krishna Sinha
Abstract
कोयल की मधुर आवाज़ गूँजी
कलियाँ विकसित हुई पुष्प बन
पतझर की नीरवता टूटी
वृक्षों से झर रहे मकरंद
वन वन शोभित
हरित कुंज है
ओ री सखी
ये वसंत की आहट है।
मन पुलकित,
तन मगन नृत्य में..
जन जन शोभित
ज्यो उत्सव में
वो नन्ही पीड़...
हुनर
मेरे लिए खास
राष्ट्र की खा...
तमाशा
हम रेगिस्तान ...
अक्स
राज
यूँ ही
नन्ही गौरिया
हर दिल में गर्व सम्मान का चमत्कार है हमारी लक्ष्मी का बेटा जिले सुबेदार है हर दिल में गर्व सम्मान का चमत्कार है हमारी लक्ष्मी का बेटा जिले सुबेदार है
उस कमरे को खाली ही रहने देना, वो खाली कमरा, मुझे पूरी तरह जानता है। उस कमरे को खाली ही रहने देना, वो खाली कमरा, मुझे पूरी तरह जानता है।
अपने से दूर रखने का इंतजाम करते जा रहे हैं। अपने से दूर रखने का इंतजाम करते जा रहे हैं।
राष्ट्रप्रेम की भावनाओं का, जिनको होता नहीं है अर्थ उन नरों का जीवन भी क्या है राष्ट्रप्रेम की भावनाओं का, जिनको होता नहीं है अर्थ उन नरों का जीवन भी क्या ह...
बाईस नवंबर दो हजार चौबीस का दिन और आसीन हो जायेंगे अयोध्या के राजा राम। बाईस नवंबर दो हजार चौबीस का दिन और आसीन हो जायेंगे अयोध्या के राजा राम।
हिंदी का सम्मान हमारा स्वयं का देश का है सम्मान, हिंदी का सम्मान हमारा स्वयं का देश का है सम्मान,
अपने सतीत्व के लिए अग्नि परीक्षा देती हैं। न जाने कैसी होती हैं ये स्त्रियां ? अपने सतीत्व के लिए अग्नि परीक्षा देती हैं। न जाने कैसी होती हैं ये स्त्र...
अगली पीढ़ी के लिए मौत का उपहार अपने ही हाथों से तैयार कर रहे हैं। अगली पीढ़ी के लिए मौत का उपहार अपने ही हाथों से तैयार कर रहे हैं।
यहाँ तो दरिया में पड़े पत्थर की तरह कतरा कतरा टूटा हूँ मैं यहाँ तो दरिया में पड़े पत्थर की तरह कतरा कतरा टूटा हूँ मैं
रावण को देखा, फिर शीश झुकाया उसने बड़े प्यार से मुझे उठाया गले लगाया, मेरी पीठ थपथपाया रावण को देखा, फिर शीश झुकाया उसने बड़े प्यार से मुझे उठाया गले लगाया, मेरी ...
गुलामी की बेड़ियों को हमने कई वर्षों तक सहा है, क्या होती गुलामी लंबे समय तक महसूस किय गुलामी की बेड़ियों को हमने कई वर्षों तक सहा है, क्या होती गुलामी लंबे समय तक ...
कोई अल्हड़ हँसता रहता है। देखे मैंने हरदिल बस्ते ! कोई अल्हड़ हँसता रहता है। देखे मैंने हरदिल बस्ते !
चलो दिवाली का एक नया रूप हम दिखाते हैं, दिवाली ऐसी भी होती आप सबको बताते हैं। चलो दिवाली का एक नया रूप हम दिखाते हैं, दिवाली ऐसी भी होती आप सबको बताते हैं।
सूरज की किरणों से आज, स्वयं नग्न जल जाऊं मैं सूरज की किरणों से आज, स्वयं नग्न जल जाऊं मैं
गुप्त आत्मालाप से जाग्रत हो उठती है, आत्म अनुभूतियाँ। गुप्त आत्मालाप से जाग्रत हो उठती है, आत्म अनुभूतियाँ।
अब तक अपने मन के भाव तुमने व्यक्त किए, अब मेरे भावों को समझना तुम अब तक अपने मन के भाव तुमने व्यक्त किए, अब मेरे भावों को समझना तुम
अप्राकृतिक खाद्य पदार्थों का लुप्त होते जाना स्वास्थ्य पर बीमारियों का पहरा अप्राकृतिक खाद्य पदार्थों का लुप्त होते जाना स्वास्थ्य पर बीमारियों का पहरा
जीवन बदल दिया । शब्द नाद ने ब्रह्मांड को गुंजित कर दिया । जीवन बदल दिया । शब्द नाद ने ब्रह्मांड को गुंजित कर दिया ।
इसलिए घर के साथ-साथ रिश्तों में भी दीमक सी लगने लगी है। इसलिए घर के साथ-साथ रिश्तों में भी दीमक सी लगने लगी है।