STORYMIRROR

Shailaja Bhattad

Abstract

4  

Shailaja Bhattad

Abstract

वसंत का स्वागत

वसंत का स्वागत

1 min
348

जड़ों को मृदा में आश्रय मिल जाए

फूलों की मायूसी टल जाए

भौंरों की गुंजन लौट आए

वसंत में वसंत से आलिंगन हो जाए


नई-नई कोपल से मन खिल जाए

हर आंगन सुगंधित हो जाए

जीवन में संतुलन आ जाए

फाल्गुन का रूप निखर जाए


जागृति का आगाज हो जाए

नई ऊर्जा का संचार हो जाए

प्रकृति सक्रिय हो जाए

सर्दी और ग्रीष्म से राहत मिल जाए


होली, बैसाखी सुहावनी हो जाए 

वसंत के आगमन से रोम-रोम खिल जाए

पतंगबाजी का जुनून छा जाए

किलकारियों से वसंत का स्वागत हो जाए।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract