Jalpa lalani 'Zoya'
Action Inspirational
वापस नहीं आता जो वक़्त चला गया है
बदलाव लाने का अब वक़्त आ गया है
नामुमकिन है वक़्त से आगे निकलना
वक़्त के साथ न चला उसे रोका गया है
कोशिशों से हर हालात को है बदलना
हुई है हार जब तक़दीर पे छोड़ा गया है।
किताब-ए-ज़िन्द...
राब्ता
तिश्नगी-ए-क़ुर...
दिलनशीं
चाहत तेरी
पास आओ कभी
ज़ुल्फ़ का साया
हमसा कहाँ मिल...
तू है गीत मेर...
नाउम्मीदी में...
हर बार फिर 'मैं' बनकर प्यार की नई कहानी लिखेगी। हर बार फिर 'मैं' बनकर प्यार की नई कहानी लिखेगी।
ऐसा नहीं दूसरे संग देख हमें जलन होती हो, वरण हम इसे प्रेम कह नहीं सकते। ऐसा नहीं दूसरे संग देख हमें जलन होती हो, वरण हम इसे प्रेम कह नहीं सकते।
दिखाया शौर्य और साहस रणभूमि में। दुश्मन आज भी काँपते है रानी झांसी के नाम से।। दिखाया शौर्य और साहस रणभूमि में। दुश्मन आज भी काँपते है रानी झांसी के नाम से।...
फिर से मिल जाएगा यही तो जिंदगी कहलाती है। फिर से मिल जाएगा यही तो जिंदगी कहलाती है।
प्रसन्नता से खिले हर चेहरे, कुछ ऐसा प्रयास करते है। प्रसन्नता से खिले हर चेहरे, कुछ ऐसा प्रयास करते है।
मत लौट कर दोबारा मेरी जिंदगी में आना। मत लौट कर दोबारा मेरी जिंदगी में आना।
आँसू इनके भी बह जाते हैं, अपने ही जब अपनों से कट जाते हैं। आँसू इनके भी बह जाते हैं, अपने ही जब अपनों से कट जाते हैं।
बड़ा बेदर्द था जालिम उड़ा कर ले गया सब धन। बड़ा बेदर्द था जालिम उड़ा कर ले गया सब धन।
कविता कुछ ज्यादा ही बड़ी हो गई यार, भगवान आप सभी को दे अमन-चैन और प्यार। कविता कुछ ज्यादा ही बड़ी हो गई यार, भगवान आप सभी को दे अमन-चैन और प्यार।
ये तो बता तुझे किस बात की कमी है ? ये तो बता तुझे किस बात की कमी है ?
ताकि कोई और मेरे और तुम्हारे जैसी लड़की के साथ ये ना हो पाएं। ताकि कोई और मेरे और तुम्हारे जैसी लड़की के साथ ये ना हो पाएं।
बाहर निकलो घर से और सीखो आत्म-रक्षा के गुर बाहर निकलो घर से और सीखो आत्म-रक्षा के गुर
तुझमे तेरे बदलाव की, सुधर जाए फिर ये जहाँ, प्रेम समर्पण के भाव से। तुझमे तेरे बदलाव की, सुधर जाए फिर ये जहाँ, प्रेम समर्पण के भाव से।
कोई माफी मांगे और कोई माफ करे यहाँ जिंदगी फिर से मिलती नहीं है। कोई माफी मांगे और कोई माफ करे यहाँ जिंदगी फिर से मिलती नहीं है।
जिस दिन मिलेगी दोनों को आन-बान-शान। जिस दिन मिलेगी दोनों को आन-बान-शान।
और सबको समझा रही हूं कि मैं नीर। और सबको समझा रही हूं कि मैं नीर।
जनमानस के भीतर उबाल नहीं उठता तेरे लब पर कोई सवाल क्यों नहीं उठता ? जनमानस के भीतर उबाल नहीं उठता तेरे लब पर कोई सवाल क्यों नहीं उठता ?
तुझे स्वयं से है जीतना, फिर जीत पाएगी तू जग जगमगा पाएगी वसुंधरा तुझे स्वयं से है जीतना, फिर जीत पाएगी तू जग जगमगा पाएगी वसुंधरा
कुछ तो सकारात्मकता लाओ, समझने में एक पल और लगाओ। कुछ तो सकारात्मकता लाओ, समझने में एक पल और लगाओ।
एक अंधेरी दौड़, और खुद से खुद की दूरी।। एक अंधेरी दौड़, और खुद से खुद की दूरी।।