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मिली साहा

Inspirational

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मिली साहा

Inspirational

वो पिता होता है

वो पिता होता है

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थामकर जिसकी उंगली को हमें गर्व महसूस होता है,

जिसका प्यार जीवन की धूप में भी शीतलता देता है,

धरती सा धीरज जिसमें, होती है आसमां सी ऊंँचाई,

स्वयं से पहले संतान की सोचे जो, वो पिता होता है।


कभी वो मान हमारा तो कभी स्वाभिमान बनता है,

अपने ख़्वाब भुला कर हमारे ख़्वाबों को संजोता है,

दौड़ता उम्रभर हमारे लिए कभी करता नहीं विश्राम,

जिसकी डांट में भी छुपा है प्यार, वो पिता होता है।


देख कर चेहरा हमारा, मन की बात समझ जाता है,

हर मुश्किल घड़ी में ढाल बनकर साथ वो चलता है,

विश्वास का प्रबल प्रकाश बनता टूटी हुई उम्मीदों में,

हमारी हिम्मत, हमारा हौसला जो, वो पिता होता है।


हमारी ख्वाहिशों, हमारे सपनों को, आकार देता है,

हमारा भविष्य बनाने हेतु खुद को भी भुला देता है,

स्वयं सहता हर तकलीफ़, पर हमें नाजो से पालता,

जिसके कंधे बनते प्यार का झूला वो पिता होता है।


जीना सिखाता है हमें,खुशियों का रास्ता बनाता है,

सख़्त है ऊपर से पर दिल मोम सा कोमल होता है,

जो पहचान है हमारी, दुनिया जिसके बिना है बेरंग,

गलती पर जो है प्यार से समझाए वो पिता होता है।


अपना प्रेम कभी जताता नहीं जो वो पिता होता है,

जीवन में अनुशासन जो सिखाता वो पिता होता है,

भविष्य की सीढ़ी का मार्ग बताता मंजिल पाने हेतु,

जो हमारे आंँसुओं को रोक लेता, वो पिता होता है।


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