वो खुद को बहकाए बैठे हैं
वो खुद को बहकाए बैठे हैं
वो फूलों में खंजर छुपाए बैठे हैं,
हम ही खुद को बहकाये बैठें हैं।
अतह समुंदर है हम,
वो हमारे सूखने की उम्मीद लगाए बैठे हैं
हम चलें है जिनको मझधार में बचाने,
वो हमें डूबाने का ख्बाव सजाएं बैठे हैं।
तूफान हूं मैं, वो जानते हैं,
फिर भी हम से रास्तों में टकराए बैठे हैं।
