वो हमसफ़र वही है
वो हमसफ़र वही है
चाँद रात में ढले
दिल थोड़ा- सा जले
अँधेरों के सन्नाटों में
ख़्वाब आहिस्ता यूँ चले...x२
दिल ख़ामोश हुए तो
उजालों के साथ में...
वो हमसफ़र वही है
जो है ख़्वाब में..x२
जी करता है देख लूँ मैं
वो रहें मेरे पलकों तले...
न रहें वो दूर अपनों से
सॉँसें दोनों के जो चलें..x२
छूटे न कभी अपने लहमें
रहें वो जज़्बात में..
वो हमसफ़र वही है
जो है ख़्वाब में..x२
कल तक थे आँखों में
आज गम दिल में ठहरा है
तेरे बगैर कुछ अच्छा नहीं..
लगता है कुछ पहरा है x२
कैसे मैं जाने दूँ तुम्हें..
जो लगती हसीं तू रात में..
वो हमसफ़र वही है
जो है ख़्वाब में..x२
चाँद रात में ढले
दिल थोड़ा- सा जले
अंधेरों के सन्नाटों में
ख़्वाब आहिस्ता यूँ चले...x२
दिल ख़ामोश हुए तो
उजालों के साथ में...
वो हमसफ़र वही है
जो है ख़्वाब में..x२

