STORYMIRROR

Manoj Kumar

Romance Thriller

4  

Manoj Kumar

Romance Thriller

वो हमसफ़र वही है

वो हमसफ़र वही है

1 min
300

चाँद रात में ढले

दिल थोड़ा- सा जले

अँधेरों के सन्नाटों में

ख़्वाब आहिस्ता यूँ चले...x२


दिल ख़ामोश हुए तो

उजालों के साथ में...

वो हमसफ़र वही है

जो है ख़्वाब में..x२


जी करता है देख लूँ मैं

वो रहें मेरे पलकों तले...

न रहें वो दूर अपनों से

सॉँसें दोनों के जो चलें..x२


छूटे न कभी अपने लहमें

रहें वो जज़्बात में..

वो हमसफ़र वही है

जो है ख़्वाब में..x२


कल तक थे आँखों में

आज गम दिल में ठहरा है

तेरे बगैर कुछ अच्छा नहीं..

लगता है कुछ पहरा है x२


कैसे मैं जाने दूँ तुम्हें..

जो लगती हसीं तू रात में..

वो हमसफ़र वही है

जो है ख़्वाब में..x२


चाँद रात में ढले

दिल थोड़ा- सा जले

अंधेरों के सन्नाटों में

ख़्वाब आहिस्ता यूँ चले...x२


दिल ख़ामोश हुए तो

उजालों के साथ में...

वो हमसफ़र वही है

जो है ख़्वाब में..x२


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance