STORYMIRROR

Shreya Rai

Romance Fantasy

4  

Shreya Rai

Romance Fantasy

वो चेहरा

वो चेहरा

1 min
253

देखा जो तुमको थम सी गई

मेरी रूह ने मुझपे ही रहम की

और आगे बढ़ने को दिल नेे भी इजाजत दी।


मन किया उस छण को वहीं रोक दूं

समय अपने बस में हो तब तो कुछ करूूं

लेकिन उस पल को मैंने ऐसे ही जाने दिया 

अगले दिन का बेसब्री से इंतजार किया।।


आखिर हुआ वहीं जो होना था

मैं आगे बढ़ी, रूकी, फिर रूक सी गई

बस सोचते हुए खुद में खुद से उलझती गई ।।


जहन में शांति, मन में हलचल थी

समां ही ऐसा था न होश था न मैं वश में थी। 

बस उस चेहरे की तालाश हमेेशा रहती है

आंखों से ओझल होकर भी कुछ खास है

मानों ऐसा लगे हरपल मेरे ही आस- पास है।। 


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance