Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer
Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer

Arpita Sahoo

Abstract

5.0  

Arpita Sahoo

Abstract

वो भी क्या दिन थे

वो भी क्या दिन थे

1 min
403


वो भी क्या दिन थे

कुछ अजनबी से

कुछ आनजाने से


ना शिकवा थी

ना शिकायत किसी से


था हसीन हर वो लम्हा


जहां साथ महबूब था

और था साथ महबूब का


मगर.....

खुशनसीबी भी नसीब हुई

कुछ इस कदर....


ना महबूब का साथ रहा

ना साथ महबूब रहा


Rate this content
Log in